बिजौलिया।स्मार्ट हलचल|विश्व आयुर्वेद परिषद चित्तौड़गढ़ प्रांत के तत्वावधान में विश्व मांगल्य दिवस मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, आंट में विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन राजकीय आयुर्वेद औषधालय, आंट के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ संजय नागर द्वारा किया गया, जिसमें विद्यार्थियों को आयुर्वेद की उपयोगिता एवं मकर संक्रांति के आध्यात्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं स्वास्थ्य संबंधी महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार की पद्धति ही नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की वैज्ञानिक जीवनशैली है। दिनचर्या, ऋतुचर्या, संतुलित आहार, योग एवं प्राणायाम के माध्यम से शरीर, मन और आत्मा को स्वस्थ रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में आयुर्वेद का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि यह शरीर की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर रोगों से रक्षा करता है।
मकर संक्रांति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि यह पर्व सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है, जो सकारात्मक ऊर्जा, स्वास्थ्य और नए जीवन के आरंभ का संदेश देता है। इस अवसर पर तिल, गुड़, खिचड़ी एवं मौसमी आहार के सेवन को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताया गया तथा दान, सेवा और आपसी सद्भाव के सामाजिक महत्व को भी रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों, घरेलू उपचारों तथा स्वच्छता और संतुलित जीवनशैली के बारे में भी जानकारी दी गई। सभी छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम को ध्यानपूर्वक सुना और आयुर्वेद अपनाने का संकल्प लिया।
अंत में विश्व आयुर्वेद परिषद द्वारा स्वास्थ्य संरक्षण और जनकल्याण के लिए ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों को निरंतर जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया गया।


