बछबारस पर्व पर गौमाता और बछड़ों की पूजा महिलाओं ने व्रत रखकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की

सत्यनारायण सेन गुरला

गुरला, स्मार्ट हलचल|भीलवाड़ा जिले के गुरला कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण अंचल में मंगलवार को बछबारस यानी गोवत्स द्वादशी का पर्व श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही महिलाएं गौमाता और बछड़ों की पूजा-अर्चना के लिए पहुंचीं। महिलाओं ने व्रत रखकर विधि-विधान से पूजन किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।गुरला के गली-मोहल्लों में महिलाओं ने गौमाता और बछड़ों का पूजन किया। इस दौरान ने मीरा देवी सेन बछबारस की कथा सुनाई।महिलाओं ने गौमाता को रोली से तिलक लगाया और दही, भीगा बाजरा, आटा, घी सहित पूजा सामग्री अर्पित की।जिन महिलाओं को गाय-बछड़ा उपलब्ध नहीं हुआ, उन्होंने मिट्टी से बनी गाय-बछड़े की प्रतिमाओं की पूजा की। मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना हुई।

श्रद्धालुओं ने गौमाता को हरा चारा खिलाकर दान-पुण्य किया।धार्मिक मान्यता के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वादशी को गोवत्स द्वादशी या बछबारस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं संतान की सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार बछबारस पर गेहूं, चावल और गाय के दूध से बने पदार्थों का सेवन नहीं किया जाता।

गुरला में बछबारस पर्व पर महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ गौमाता और बछड़ों का पूजन कर परिवार की खुशहाली की कामना की।

रेखा सेन, मीरा देवी सेन, जया देवी, कान्ता, सीमा देवी, उषा सेन, पायल सेन, वंदना दाधीच इनके साथ कई महिलाएं मौजूद थीं