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तहव्वुर राणा को भारत लाए जाना यह भारत की संप्रभुता का प्रतीक- चिश्ती

*26/11 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर राणा
*पाकिस्तान में छिपे देश के दुश्मनों को भारत लाकर न्याय की प्रक्रिया को आगे
*भारत सरकार ने देशवासियों के मन में वर्षों से बने घावों पर मरहम रखने का काम

(हरिप्रसाद शर्मा)

अजमेर/स्मार्ट हलचल/अजमेर दरगाह के प्रमुख उत्तराधिकारी एवं ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के चेयरमैन सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर राणा को भारत लाए जाने पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि दी है। यह कदम उन बहादुर जवानों के प्रति देश की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का प्रतीक है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।चिश्ती ने कहा कि इस फैसले से न केवल शहीदों के परिजनों को न्याय की आशा मिली है, बल्कि भारत सरकार ने देशवासियों के मन में वर्षों से बने घावों पर मरहम रखने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम दर्शाता है कि भारत अब आतंकवाद और उसके समर्थकों को किसी भी समय और कहीं भी जवाबदेह ठहराने में पूरी तरह सक्षम है।

उन्होंने कहा कि 26/11 जैसा आतंकी हमला सिर्फ मुंबई पर नहीं बल्कि पूरे भारत की आत्मा पर हमला था। ऐसे अपराधियों को सजा दिलाना न्याय की स्थापना है और आने वाली पीढ़ियों के लिए यह एक सख्त संदेश है कि भारत अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा को लेकर पूरी तरह सजग और प्रतिबद्ध है।

सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने यह भी विश्वास जताया कि भारत सरकार भविष्य में भी पाकिस्तान में छिपे देश के दुश्मनों को भारत लाकर न्याय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी, चाहे वे जिंदा हों या मुर्दा। यह भारत की न्याय प्रणाली और उसकी संप्रभुता की शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने इस साहसी और न्यायसंगत निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सभी संबंधित एजेंसियों का आभार व्यक्त किया।

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