इश्क़-ए-औलिया की महक से महका निंबाहेड़ा — रोशन अली बावा साहब के उर्स में कव्वाली की रूहानी रात”*
निंबाहेड़ा, 01 मई 2026
स्मार्ट हलचल|मेवाड़ की सरज़मीं पर सूफियाना परंपरा की रिवायत को आगे बढ़ाते हुए हज़रत रोशन अली बावा साहब रहमतुल्लाह अलैहे के 65 वें सद्भावना उर्स के तीसरे दिन जुमेरात, 30 अप्रैल की रात एक ऐसी रूहानी फिज़ा कायम हुई, जिसने हर दिल को अकीदत और मोहब्बत से सराबोर कर दिया। दरगाह परिसर में सजी महफिल-ए-कव्वाली ने न सिर्फ इबादत का एहसास कराया, बल्कि कौमी एकता और इंसानियत का पैगाम भी बुलंद किया।
दरगाह बनी दुआओं का मरकज़
शाम ढलते ही अकीदतमंदों का रुख दरगाह शरीफ की ओर हो गया। शहर के पत्रकारों और मेहमानों ने दरबार में हाज़िरी देकर अकीदत के फूल पेश किए और मुल्क में अमन-चैन, खुशहाली, तरक्की और भाईचारे की दुआ मांगी।
दरगाह का यह मंज़र इस बात का सबूत था कि सूफी दरगाहें आज भी दिलों को जोड़ने का सबसे मजबूत जरिया हैं।
रिवायत और तहज़ीब का खूबसूरत संगम
उर्स कमेटी द्वारा मंचासीन मेहमानों का इस्तकबाल मेवाड़ी परंपरा के मुताबिक साफा, गुलपोशी और दस्तारबंदी के साथ किया गया।
यह स्वागत सिर्फ एक औपचारिकता नहीं बल्कि मेवाड़ की मेहमाननवाज़ी और गंगा-जमुनी तहज़ीब का जीता-जागता उदाहरण बनकर सामने आया।
*अदबी हलकों की खास मौजूदगी*
महफिल में शहर के वरिष्ठ पत्रकार—
नुसरत खान, रियाज़ खान, ज़ाकिर हुसैन, वजाहत खान, शकील खान, अशरफ खान, फैसल खान, समीर खान, मोइन खान, वकार अहमद, अख्तर खान, डॉ. आवेश खान, डॉ. समीर—बतौर मुख्य अतिथि शरीक हुए।
इसके अलावा उदयपुर से हाजी सय्यद अमजद अली, छोटीसादड़ी मुराद अली शाह उर्स कमेटी के सदर कालू भाई, नीमच उर्स कमेटी के सदर मुन्ना भाई दुर्रानी सहित सूफी अज्जू भाई, जलील भाई, मुय्यन भाई आदि की मौजूदगी ने महफिल की रौनक को चार चांद लगा दिए।
*जब सूफियाना कलाम ने छेड़ी दिल की तार…*
महफिल-ए-कव्वाली में दिल्ली के मशहूर कव्वाल आमिल आरिफ साबरी और उनकी टीम ने अपने खास अंदाज़ में कलाम पेश कर समा बांध दिया।
“अल मदद गोस-ए-आज़म…” और “कलंदरों से मत पूछो…” जैसे कलामों के साथ मौला अली और हज़रत इमाम हुसैन की शान में पेश की गई पेशकश ने महफिल को वज्द में पहुंचा दिया।
रोशन अली बावा साहब की निस्बत में पढ़े गए कलामों ने पूरी फिज़ा को और भी पुरनूर कर दिया—जहां हर शख्स इश्क़-ए-औलिया में डूबा नजर आया।
*इंतज़ामिया की मुस्तैदी, अकीदतमंदों का सैलाब*
उर्स कमेटी और रोशन अली बावा साहब सेवा संस्थान के पदाधिकारियों ने कार्यक्रम को सुव्यवस्थित बनाने में अहम भूमिका निभाई।
सदर सादिक हुसैन, नायब सदर ज़ाकिर हुसैन, सचिव मतलूब अजमेरी, संयोजक मोहम्मद फारूक छीपा, कोषाध्यक्ष अयाज़ खान सहित बड़ी तादाद में कार्यकर्ता सक्रिय नजर आए।
वहीं शहर और आसपास के क्षेत्रों से आए अकीदतमंदों की भारी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि यह उर्स सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि लोगों के दिलों की आस्था का केंद्र है।
*सूफी पैग़ाम: मोहब्बत ही असल राह*
पूरे कार्यक्रम के दौरान एक ही संदेश उभरकर सामने आया—
“सूफी परंपरा नफरत नहीं, मोहब्बत सिखाती है; फर्क नहीं, बल्कि एकता का रास्ता दिखाती है।”
रोशन अली बावा साहब का यह उर्स आज भी उसी रूहानी ताकत के साथ लोगों को जोड़ रहा है, जो समाज में भाईचारे और इंसानियत की बुनियाद को मजबूत करती है।
