ज्ञान भारतम मिशन’ का बूंदी में आगाज, घर में रखे हैं पुराने हस्तलिखित ग्रंथ तो प्रशासन को दें जानकारी

बूंदी- भारत की समृद्ध प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण, सर्वेक्षण और डिजिटलीकरण के लिए केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित महत्वाकांक्षी ‘ज्ञान भारतम मिशन’ बूंदी जिले में शुरू हो गया है। संस्कृति मंत्रालय की इस अनूठी पहल के तहत देशभर की एक करोड़ से अधिक प्राचीन पांडुलिपियों को सहेज कर उन्हें आमजन के लिए सुलभ बनाया जाएगा। इस प्राचीन ज्ञान-संपदा को डिजिटल दुनिया में अमर करने के लिए जिला स्तर पर जल्द ही एक व्यापक सर्वे अभियान शुरू किया जा रहा है।
जिला कलक्टर हरफूल सिंह यादव के निर्देशानुसार इस महाभियान को जिले में अमलीजामा पहनाने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। अभियान के सुचारू संचालन के लिए राजकीय महाविद्यालय बूंदी की प्राचार्य डॉ. अनीता यादव को जिला नोडल अधिकारी और पर्यटन विभाग के पर्यटक अधिकारी प्रेमशंकर सैनी को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। मिशन को लेकर हाल ही में राजकीय महाविद्यालय में समिति के सदस्यों की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वे और संरक्षण की रूपरेखा पर विस्तार से मंथन हुआ।

इन भाषाओं के ग्रंथों की है तलाश, घर आएंगे सर्वेयर

जिला नोडल अधिकारी डॉ. अनीता यादव ने बताया कि जिले के हर कोने में छुपे हस्तलिखित ग्रंथों को खोजने के लिए विशेष अभियान चलेगा। उन्होंने सभी उपखंड स्तरीय कार्यकर्ताओं, इतिहासकारों, शोधकर्ताओं और निजी पुस्तकालय संचालकों से विशेष अपील की है कि वे अपने या परिचितों के पास मौजूद पुराने हस्तलिखित ग्रंथों की जानकारी प्रशासन से साझा करें। ये दुर्लभ ग्रंथ हिन्दी, संस्कृत, अरबी, फारसी या उर्दू किसी भी भाषा में हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि जैसे ही किसी पांडुलिपि की जानकारी मिलेगी, प्रशासन द्वारा नियुक्त सर्वेयर खुद संबंधित स्थान पर जाएंगे। वहां जाकर वे पांडुलिपियों का सर्वे करेंगे और उसका पूरा विवरण ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। कोई भी इच्छुक व्यक्ति या संस्थान जिनके पास ऐसे प्राचीन ग्रंथ मौजूद हैं, वे सीधे डॉ. अनीता यादव से मोबाइल नम्‍बर 9024249031 तथा प्रेमशंकर सैनी से मोबाइल नम्‍बर 9928623304 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, संबंधित अधिकारी को ईमेल के माध्यम से भी प्राचीन पांडुलिपियों के बारे में सूचना दी जा सकती है।