एजाज़ अहमद उस्मानी
मेड़ता रोड।स्मार्ट हलचल|देशभर के रेलवे स्टेशनों पर खान-पान सेवाएं संचालित करने वाले हजारों छोटे विक्रेताओं की स्थिति गंभीर होती जा रही है। अखिल भारतीय रेलवे खान-पान लाइसेंसी एसोसिएशन (पंजीकृत) ने रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड को पत्र लिखकर लाइसेंस शुल्क में तत्काल राहत और चाय व मिनरल वाटर के दामों में वृद्धि की मांग की है।
एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अध्यक्ष रविंदर गुप्ता ने अपने पत्र में बताया कि मध्य-पूर्व में जारी ईरान-अमेरिका-इज़राइल संघर्ष के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट ने छोटे विक्रेताओं की कमर तोड़ दी है। तेल रिफाइनरियों और एलएनजी गैस संयंत्रों पर हमलों के चलते गैस और कच्चे तेल की भारी कमी हो गई है, जिसका सीधा असर रेलवे स्टेशनों पर काम कर रहे खान-पान विक्रेताओं पर पड़ रहा है।पत्र के अनुसार, वर्तमान समय में एलपीजी गैस सिलेंडर प्राप्त करना बेहद कठिन हो गया है। जहां सिलेंडर उपलब्ध हैं, उनकी कीमत 2000 से 5000 रुपये तक पहुंच चुकी है। साथ ही, 1 मार्च 2026 से वाणिज्यिक सिलेंडरों की आपूर्ति भी बंद कर दी गई है। इसके अलावा, खाद्य सामग्री सहित सभी कच्चे माल की लागत में 10 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
विक्रेताओं ने यह भी बताया कि उनकी कुल बिक्री का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा चाय और मिनरल वाटर से आता है, लेकिन इन उत्पादों के दाम पिछले 10 वर्षों से नहीं बढ़ाए गए हैं। जहां खुले बाजार में मिनरल वाटर 20 रुपये में बिकता है, वहीं रेलवे में इसे 15 रुपये में बेचना अनिवार्य है। हाल ही में जीएसटी में कमी के बाद रेलनीर की कीमत घटाकर 14 रुपये कर दी गई है, जिससे विक्रेताओं पर और दबाव बढ़ गया है। इसके साथ ही, विक्रेताओं पर कई प्रकार के कर और शुल्क भी लागू हैं। इनमें 18 प्रतिशत जीएसटी (लाइसेंस शुल्क पर), 5 प्रतिशत जीएसटी (बिक्री पर), 12 प्रतिशत लाइसेंस शुल्क, 10 से 15 प्रतिशत कमीशन और 5 से 10 प्रतिशत अन्य कर शामिल हैं। कुल मिलाकर ये लागत उत्पाद की कीमत का लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच जाती है, जबकि वास्तविक लाभ मात्र 30 प्रतिशत रह जाता है।
एसोसिएशन ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि देशभर में 20 से 30 प्रतिशत ढाबे, रेस्टोरेंट और होटल इस संकट के चलते बंद हो चुके हैं। कई रेलवे विक्रेताओं ने भी अपने 20 से 50 प्रतिशत यूनिट्स समर्पित करने के लिए आवेदन दे दिया है क्योंकि वे लगातार घाटे में चल रहे हैं। सरकारी सूत्रों के हवाले से पत्र में कहा गया है कि भारत में एलपीजी आपूर्ति को सामान्य होने में लगभग तीन वर्ष का समय लग सकता है। ऐसे में छोटे विक्रेताओं के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए एसोसिएशन ने रेलवे से मांग की है कि कोविड-19 महामारी के दौरान दी गई राहत की तरह वर्तमान संकट के दौरान भी लाइसेंस शुल्क में छूट दी जाए। साथ ही, चाय और मिनरल वाटर की कीमतों में संशोधन कर विक्रेताओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाया जाए।
एसोसिएशन ने उम्मीद जताई है कि रेलवे, जो हमेशा सामाजिक और आर्थिक जिम्मेदारी निभाता रहा है, इस गंभीर मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द निर्णय लेगा।
