पुनित चपलोत
भीलवाड़ा|स्मार्ट हलचल|शहर कांवा खेड़ा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय से शिक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां डेपुटेशन पर लगी अध्यापिका कृष्णा सुथार ने 14 वर्षीय छात्र को भीषण गर्मी में उठक-बैठक की कठोर सजा दे दी। आरोप है कि पहले 100 और फिर अगले दिन 200 उठक-बैठक लगवाई गईं, शिक्षका द्वारा दी गई इस प्रताड़ना से छात्र स्कूल परिसर में ही बेहोश होकर गिर पड़ा। जिसे तुरंत एमजी अस्पताल ले जाया गया। घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोग स्कूल पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। माहौल इतना गर्म हो गया कि आरोपित अध्यापिका मौके से बाइक पर बैठकर निकल गईं। वहीं विद्यालय के प्रधानाचार्य ने आरोपों को निराधार बताते हुए स्कूल में छात्र का एडमिशन ही नहीं होना बताया है।
पीड़ित की मां सुल्ताना बानो ने कहा कि मेरा बेटा 8 वीं कक्षा में पढ़ता है। मैं तीन-चार दिन पहले बेटे का एडमिशन करवाने स्कूल आई थीं, जहां शिक्षक ने मूल निवास प्रमाण पत्र मांगा। ई-मित्र की रसीद दिखाने पर भी प्रवेश नहीं दिया गया, जबकि पहले रसीद पर एडमिशन का आश्वासन दिया गया था। इस प्रक्रिया में उनके 500-600 रुपये खर्च हुए। इसके बाद सर ने उसे स्कूल में बैठाकर पढ़ाने का आश्वासन दिया तो वह स्कूल आने लग गया। सुल्ताना बानो ने शिक्षिका पर आरोप लगाते हुए कहा कि यहां कृष्णा मैडम ने पहले दिन 100 और अगले दिन 200 उठक-बैठक लगवाई, जिससे बच्चा भीषण गर्मी में बेहोश हो गया और उसे महात्मा गांधी अस्पताल ले जाना पड़ा। अगर स्कूल मे ऐसी सजा मिलेगी तो बच्चे स्कूल आने से डरेंगे और जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रदीप मेहता ने कहा कि स्कूल में तीन स्थायी शिक्षक हैं, जिनमें से दो छुट्टी पर हैं। वर्तमान में वे स्वयं, एक बीएड प्रशिक्षु और दो डेपुटेशन शिक्षक मिलकर आठ कक्षाओं को संभाल रहे हैं। सातवीं-आठवीं कक्षा में बीएड इंटर्नशिप वाले शिक्षक हैं और यदि बच्चे शरारत कर रहे थे तो उन्हें डांटा गया होगा तथा कुछ उठक-बैठक लगवाई गई होगी। मेहता ने यह भी कहा कि जिस बच्चे को लेकर विवाद हो रहा है, उसका स्कूल में एडमिशन नहीं हुआ है और उसे बैठाने की अनुमति भी नहीं दी गई थी।
प्रधानाचार्य ने 100 या 200 उठक-बैठक लगवाने के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि अधिकतम 50-60 उठक-बैठक ही लगवाई गई होगी। उस समय मैं स्कूल से बाहर सामान लेने गए थे और सूचना मिलते ही लौट आए। मैने संबंधित बीएड इंटर्नशिप शिक्षिका कृष्णा सुथार को इसके लिए फटकार लगाते हुए भविष्य में ऐसा न करने की हिदायत दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ऐसी भीषण गर्मी में छात्र से 50 से 60 उठक-बैठक लगवाना भी कहां तक जायज है। परिजन अब प्रशासन से शिक्षक खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे है।
