आर.एन.टी.विधि महाविद्यालय में मनाई रवींद्रनाथ टैगोर की जयन्ती

मांडलगढ़।स्मार्ट हलचल|गांधीनगर सेक्टर नम्बर-5,स्थित आर.एन.टी.विधि महाविद्यालय में रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती मनाई गई। कॉलेज समन्वयक गौरव त्यागी एवं प्राचार्य डॉ.मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि रवीन्द्रनाथ टैगोर को गुरुदेव के नाम से जाना जाता है।वह एक प्रसिद्ध कवि,लेखक,नाटककार,संगीतकार,दार्शनिक, समाज सुधारक और चित्रकार थे।इस अवसर पर स्थानीय आर.एन.टी.विधि महाविद्यालय में रवींद्रनाथ टैगोर की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर कार्यक्रम के प्रभारी विधि व्याख्याता जफ्फर हुसैन वैलिम ने बताया कि रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक थे,जिन्होंने प्रासंगिक आधुनिकतावाद के साथ बंगाली साहित्य और संगीत के साथ-साथ भारतीय कला को भी नया रूप दिया। उनका जन्म 07 मई,1861 को कोलकाता में माता-पिता देवेंद्रनाथ टैगोर और शारदा देवी के घर हुआ था। इसी क्रम विधि व्याख्याता ज़मीर आलम ने बताया कि टैगोर को प्रकृति को सानिध्य काफी पसंद था,उनका मानना था कि छात्रों को प्रकृति के सानिध्य में शिक्षा हासिल करनी चाहिए। अपनी इसी सोच को ध्यान में रख कर उन्होंने शांति निकेतन की स्थापना की थी। 1913 में गीतांजलि के लिए साहित्य में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले टैगोर पहले भारतीय व्यक्ति थे।इस जयंती अवसर पर विधि व्याख्याता अमित कोहली ने टेगौर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए यह बताया की रवींद्रनाथ अपने माता-पिता की तेरहवीं संतान थे। बचपन में उन्हें प्यार से ‘रबी’ बुलाया जाता था।आठ वर्ष की उम्र में उन्होंने अपनी पहली कविता लिखी, सोलह साल की उम्र में उन्होंने कहानियां और नाटक लिखना प्रारंभ कर दिया था। इसी क्रम में विधि व्याख्याता मेहा दाड ने गुरुदेव के बारे में यह बताया कि गुरुदेव लंदन बैरिस्टर की उपाधि डिग्री कर भारत में आकर इन्होंने समाज में जाति ,रंग,अमीरी,गरीबी के आधार पर जो भेदभाव किया जा रहा था,उसको दूर करने का आदत प्रयास किया। कार्यक्रम में विधि विद्यार्थी हर्षवर्धन सिंह चौहान ने भी अपने महत्वपूर्ण विचार रखें।
वरिष्ठ अधिवक्ता बी.एल.पोखरना,
व्याख्याता गजेंद्र जोशी, सोनिया राजौरा,डॉ.प्रियंका शर्मा,डॉ.अनिल कुमार,सोनू कुमार मेघवंशी,ललित कुमार मीणा, दीपक शर्मा आदि ने शुभकामनाएं प्रेषित की।कार्यक्रम का संचालन विधि व्याख्याता जफ्फर हुसैन वैलिम ने किया।