अनिल कुमार
कानून से खिलवाड़ पड़ा भारी:” फर्जी FIR दर्ज करवाने वालों को अब खानी पड़ेगी जेल की हवा।
स्मार्ट हलचल|ब्यावर बिजयनगर पुलिस और न्याय प्रणाली का दुरुपयोग कर निर्दोष लोगों को फंसाने और आपसी रंजिश निकालने वालों के खिलाफ बिजयनगर पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। जिला पुलिस अधीक्षक श्री रतन सिंह (IPS) के निर्देशानुसार, बिजयनगर थाना पुलिस ने कुल 7 ऐसे मामलों में कार्रवाई की है, जहां परिवादियों ने पुलिस और न्यायालय के माध्यम से झूठे मुकदमे दर्ज करवाए थे। पुलिस ने इन सभी 7 परिवादियों के विरुद्ध धारा 182/211 भादस के तहत कानूनी कार्रवाई हेतु न्यायालय में इस्तगासा पेश किया है।
पुलिस की चेतावनी: जेल और जुर्माना दोनों संभव
थानाधिकारी श्री करण सिंह ने बताया कि पुलिस को गुमराह करना और किसी पर झूठा आरोप लगाना गंभीर अपराध है। धारा 182 के तहत पुलिस को झूठी सूचना देने पर 6 माह की कैद और धारा 211 के तहत झूठा आरोप लगाने पर 2 से 7 साल तक की सजा का प्रावधान है।
इन मामलों में हुई कार्रवाई:
पुलिस द्वारा जारी विवरण के अनुसार, कुल 7 अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की गई है:
छेड़छाड़ का झूठा आरोप: समता बागरिया ने रिजवान व अन्य के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट और कपड़े फाड़ने का आरोप लगाया था, जो जांच में पूरी तरह झूठा पाया गया।
सिम चोरी व धोखाधड़ी: विशाल पाराशर द्वारा अतुल शर्मा के खिलाफ दर्ज कराया गया मोबाइल सिम चोरी का मामला फर्जी निकला।
जमीन और पैसों का विवाद: घासीराम चौधरी, दिनेश राव और मोहन नायक ने जमीन विवाद और धोखाधड़ी के अलग-अलग मामलों में झूठी रिपोर्ट पेश की थी।
वाहन चोरी का नाटक: नरेश चंद कुमावत (मारुति वैन) और सत्यनारायण चौधरी (ट्रैक्टर) ने भी अपने निजी विवादों या अन्य कारणों से चोरी की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसका पुलिस अनुसंधान में पर्दाफाश हो गया।
पुलिस टीम की मुस्तैदी
इस पूरी कार्रवाई में थानाधिकारी करण सिंह, सउनि सीयाराम और कांस्टेबल गजेन्द्र सिंह की विशेष भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से उन लोगों में डर पैदा होगा जो कानून का सहारा लेकर निर्दोषों को प्रताड़ित करते हैं।
