एजाज़ अहमद उस्मानी
स्मार्ट हलचल| नागौर जिले के छोटे से गांव रियांबड़ी में प्रेम की एक ऐसी कहानी सामने आई जिसने रेगिस्तानी सन्नाटे को सवालों और सरगोशियों से भर दिया। यह कहानी सिर्फ दो दिलों की नहीं, बल्कि उन सामाजिक दीवारों की भी है जिन्हें लांघने की हिम्मत हर किसी में नहीं होती।
*दोस्ती से शुरू हुई दास्तान, इश्क़ में ढला रिश्ता*
कहानी की शुरुआत साधारण थी—दो युवकों की दोस्ती। खेतों की पगडंडियों, गांव की चौपाल और रोजमर्रा की मुलाकातों के बीच यह दोस्ती धीरे-धीरे गहरी होती गई। वक्त के साथ एहसास बदले, नज़रों में अपनापन उतरा और रिश्ते ने प्रेम का रूप ले लिया।
लेकिन यह प्रेम आसान नहीं था। समाज की निगाहें, परिवार की उम्मीदें और परंपराओं की बेड़ियां—सब उनके रास्ते में खड़ी थीं। फिर भी दोनों ने साथ जीने-मरने की कसमें खाईं और एक ऐसा फैसला लिया जिसने पूरे गांव को चौंका दिया।
*जब प्रेम ने ओढ़ा दुल्हन का लिबास*
परिवार दहेज और शादी के भारी खर्चों को लेकर चिंतित था। ऐसे में अचानक “बिना खर्च की दुल्हन” का प्रस्ताव आया तो घरवालों ने राहत की सांस ली। रस्में निभाई गईं, मिठाइयां बंटी, ढोल बजे—और लाल जोड़े में सजी एक दुल्हन ने घर में प्रवेश किया।साड़ी, चूड़ियां, बिंदी, घूंघट और बदली हुई आवाज—सब इतना स्वाभाविक था कि किसी को शक तक नहीं हुआ।
सुबह की पहली किरण के साथ वह उठती, आंगन बुहारती, रोटियां बेलती, सास-ससुर के पैर छूती। गांव की औरतें कहतीं—“नई बहू तो बड़ी सुशील और संस्कारी है।”
सामाजिक कार्यक्रमों में ‘पति’ संग मुस्कुराते हुए डांस, सोशल मीडिया पर रील्स, और हर पल साथ निभाने का वादा—प्रेम जैसे खुले आकाश में सांस ले रहा था।
*शक की सुई और सच का उजागर होना*
लेकिन गांव की पैनी नजरें कब तक अनदेखा करतीं?
कुछ महिलाओं को हाव-भाव में हल्का अंतर महसूस हुआ। धीरे-धीरे कानाफूसी बढ़ी, और एक दिन सच्चाई सामने आ गई—कथित दुल्हन दरअसल एक युवक था, जिसने प्रेम के लिए अपना रूप बदला था।
सूचना मिलते ही पुलिस पहुंची और दोनों को थाने ले जाकर पूछताछ की। चूंकि मामला आपसी सहमति का बताया जा रहा है और किसी पक्ष ने औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई, इसलिए कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
*सवाल जो समाज से जवाब मांगते हैं*
यह घटना सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि कई गहरे सवाल भी छोड़ गई—
क्या प्रेम की पहचान लिंग से तय होती है?
क्या ग्रामीण समाज में समलैंगिक रिश्तों के लिए स्वीकार्यता की जगह बन पाएगी?
या सामाजिक दबाव ऐसे रिश्तों को छुपकर जीने पर मजबूर करता रहेगा?
प्रेम, साहस और छल—तीनों का संगम
इस कहानी में एक ओर प्रेम की बेखौफ उड़ान है, तो दूसरी ओर पहचान छुपाने की मजबूरी। यह घटना जहां दिलों को छूती है, वहीं सोचने पर भी मजबूर करती है कि आखिर क्यों किसी को अपने प्यार के लिए दुल्हन का वेश धारण करना पड़े?
नागौर की यह दास्तान अब गांव की चौपाल से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा में है—किसी के लिए यह साहसिक प्रेम है, तो किसी के लिए सामाजिक मर्यादाओं के खिलाफ कदम।
पर एक बात तय है—रेगिस्तान की इस कहानी ने यह साबित कर दिया कि प्यार सचमुच अनोखे रंगों में रंगा होता है।










