“सेवा शून्य, वसूली फुल”: भीलवाड़ा में बिना सुविधा ‘यूजर्स चार्ज’ थोपने पर भड़की जनता, चुनाव से पहले निगम का विरोध तेज

“सेवा शून्य, वसूली फुल”: भीलवाड़ा में बिना सुविधा ‘यूजर्स चार्ज’ थोपने पर भड़की जनता, चुनाव से पहले निगम का विरोध तेज

भीलवाड़ा (जम / स्मार्ट हलचल)। नगर निगम द्वारा शहर में ‘यूजर्स चार्ज’ (उपयोगकर्ता शुल्क) को अनिवार्य किए जाने के फैसले ने शहरवासियों के गुस्से को भड़का दिया है। निगम का तर्क है कि सफाई व्यवस्था और शहरी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए संसाधनों की जरूरत है। लेकिन दूसरी तरफ जनता ने निगम की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल दागते हुए पूछा है— “जब शहर में मूलभूत सुविधाएं ही पूरी तरह चरमराई हुई हैं, तो आखिर निगम किस सेवा का शुल्क वसूलना चाहता है?”

सफाई नदारद, RFID कार्ड और अतिक्रमण हटाओ अभियान पर उठे सवाल

नागरिकों का कहना है कि कॉलोनियों में सफाईकर्मी 10-15 दिन में एक बार दिखाई देते हैं। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। ऐसे में यूजर्स चार्ज थोपना जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। निगम द्वारा कचरा संग्रहण की मॉनिटरिंग के लिए घरों के बाहर लगाए जा रहे ‘RFID कार्ड’ को लेकर भी जनता का कहना है कि पहले व्यवस्था सुधारें, फिर ‘टेक्नोलॉजी का ढोल’ पीटें। वहीं, अतिक्रमण हटाओ अभियान भी महज खानापूर्ति साबित हुआ है, जहां मलबे के ढेर पड़े हैं और अतिक्रमण दोबारा पनप गए हैं।

बारिश सिर पर, नाले जाम; चुनावी साल में जनआंदोलन की चेतावनी

मानसून सिर पर है, लेकिन शहर के बड़े नाले अब तक साफ नहीं हुए हैं। आवारा पशुओं के आतंक और टूटी सड़कों ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। शहरवासियों की स्पष्ट मांग है कि “पहले सुविधाएं दें, फिर टैक्स मांगें।”

चूंकि नगर निगम चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में यूजर्स चार्ज का मुद्दा राजनीतिक तूल पकड़ता दिख रहा है। कई सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि निगम ने यह ‘वसूली का फरमान’ वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में यह एक बड़ा जनआंदोलन बन जाएगा।