सुनेल 9 अप्रैल ।स्मार्ट हलचल|न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद व्यवस्था इन दिनों अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। खरीदी केंद्र पर पिछले पांच दिनों से गेहूं तुलाई का कार्य पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है, जिससे किसान भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। केंद्र पर लगभग 5 हजार बोरी गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा है और मौसम में बदलाव के चलते किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
किसानों का आरोप है कि खरीदी केंद्र पर तिरपाल जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं तक उपलब्ध नहीं करवाई गई हैं। जबकि प्रशासन द्वारा पहले ही गेहूं को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद संवेदक और संबंधित एजेंसी की लापरवाही सामने आ रही है। अचानक मौसम खराब होने और तेज हवाओं के चलते किसानों को अपनी उपज खराब होने का डर सताने लगा है।
जानकारी के अनुसार खरीदी प्रक्रिया 1 अप्रैल से शुरू हुई थी, लेकिन शुरुआत से ही तुलाई की गति बेहद धीमी बनी हुई है। प्रतिदिन करीब 2 हजार कट्टे तौलने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। नतीजन खरीदी केंद्र पर किसानों की लंबी कतारें लग गई हैं और ट्रैक्टर-ट्रॉली कई-कई दिनों से लाइन में खड़ी हैं।
बारदान और हम्मालों की कमी बनी बड़ी समस्या
किसानों ने बताया कि केंद्र पर बारदान और हम्मालों की भारी कमी बनी हुई है। टोकन मिलने के बाद भी किसानों को 10 से 12 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। कई किसानों के टोकन की अवधि समाप्त होने के कारण उन्हें दोबारा टोकन रिन्यू करवाने पड़ रहे हैं। किसानों ने तुलाई प्रक्रिया में पक्षपात और अनियमितताओं के आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ किसानों की सीरियल संख्या को नजरअंदाज कर पहले तुलाई कर दी जाती है, जबकि अन्य किसान लंबे समय तक इंतजार करने को मजबूर हैं।
मजबूरी में कम दाम पर बेच रहे गेहूं
सरकार द्वारा गेहूं का समर्थन मूल्य 2735 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है, लेकिन खरीदी केंद्र की बदहाल व्यवस्था के चलते कई किसान अपनी उपज बाजार में 2200 से 2300 रुपए प्रति क्विंटल तक बेचने को मजबूर हो रहे हैं। इससे किसानों को प्रति क्विंटल 400 से 500 रुपए तक का सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं लंबे इंतजार के कारण मजदूरी और परिवहन खर्च भी लगातार बढ़ रहा है।
किसानों ने सुनाई पीड़ा
किसान दिनेश धाकड़, श्यामलाल गुर्जर, किशनलाल भंडारी, प्रीतम, सौदानसिंह , अंकित और शोभाराम सहित कई किसानों ने बताया कि उनका तुलाई नंबर 13 से 17 अप्रैल के बीच का था, लेकिन अब तक उनकी उपज की तुलाई नहीं हो सकी है। ट्रैक्टर-ट्रॉलियां गेहूं से भरी लाइन में खड़ी हैं, जिससे कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। किसानों का आरोप है कि संवेदक द्वारा गेहूं में बार-बार खामियां बताकर तुलाई कार्य को जानबूझकर रोका जा रहा है, जिससे किसान मानसिक रूप से परेशान हैं।
प्रशासन से समाधान की मांग
किसानों ने प्रशासन से जल्द व्यवस्था सुधारने, पर्याप्त बारदान उपलब्ध कराने, हम्मालों की संख्या बढ़ाने तथा खुले में पड़े गेहूं को सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल की व्यवस्था करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो मौसम खराब होने की स्थिति में हजारों क्विंटल गेहूं खराब हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और संवेदक की होगी।
