धनोप की मिट्टी से भूगर्भ से 2001 में प्रकट हुईं प्राचीन जैन प्रतिमाएं,अब 2 करोड़ की लागत से बने भव्य जिनालय में होगा ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव..
शाहपुरा(किशन वैष्णव ) नई राज्यास आज यह केवल एक गांव नहीं, बल्कि जैन धर्म की आस्था, तपस्या और चमत्कारिक इतिहास का जीवंत प्रतीक बनने जा रहा है। यहां की पावन धरा पर वह अलौकिक क्षण आने जा रहा है,जब 1100 वर्षों तक भूगर्भ में विराजित रही दिव्य प्रतिमाएं भव्य दिगम्बर जिनालय में विराजमान होंगी। सदियों पुरानी दिव्यता अब पुनः श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए प्रकट होने जा रही है।नई राज्यास के गोदा परिवार के तीन घरों द्वारा संयुक्त रूप से करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से विशेष पाषाण शैली में निर्मित यह जिनालय आज दूर-दूर तक श्रद्धा और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।वियतनाम के सफेद पत्थर और बंशीपुर पहाड़ के विशेष पाषाण से निर्मित मंदिर अपनी अद्भुत नक्काशी,विशाल शिखरों और दिव्य स्थापत्य से पहली नजर में ही आध्यात्मिक अनुभूति कराता है। गोदा परिवार के कमल गोदा और राजकुमार गोदा का कहना है कि सन 2001 में धनोप में नदी की खुदाई 1100 वर्षों पुरानी भगवान आदिनाथ, पारसनाथ भगवान, नंदीश्वर द्वीप की प्रतिमाएं निकाली थी उनका कहना है कि वर्ष 2001 में धनोप क्षेत्र में सामान्य खुदाई के दौरान किसी को अंदाजा नहीं था कि मिट्टी के नीचे सदियों पुराना धार्मिक इतिहास छिपा बैठा है। अचानक खुदाई के दौरान प्राचीन दिगम्बर जैन प्रतिमाएं निकलनी शुरू हुईं। भगवान आदिनाथ, पारसनाथ भगवान, नंदीश्वर द्वीप की प्रतिमाएं निकाली।इन दिव्य प्रतिमाओं को देखकर मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। श्रद्धालुओं ने इसे धर्म का चमत्कार माना।
जैसे-जैसे मिट्टी हटती गई, वैसे-वैसे इतिहास स्वयं प्रकट होता गया। सूचना मिलते ही नई राज्यास से गोदा परिवार धनोप पहुंचा और पूरे श्रद्धाभाव के साथ इन दिव्य प्रतिमाओं को गांव लेकर आया। इसके बाद 23 मई 2001 को गांव के छोटे मंदिर में इन प्रतिमाओं की वेदी प्रतिष्ठा की गई।वर्षों तक श्रद्धालु उसी छोटे मंदिर में भगवान के दर्शन करते रहे। लेकिन समय के साथ मंदिर जीर्ण-शीर्ण होने लगा। तब गोदा परिवार ने संकल्प लिया कि इन चमत्कारिक प्रतिमाओं के लिए ऐसा जिनालय बनाया जाए, जो आने वाली पीढ़ियों तक धर्म और संस्कृति की पहचान बने।5 फरवरी 2022 को मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर महाराज के सानिध्य में मंदिर की पावन नींव रखी गई तथा शिलान्यास एवं शिलि अभ्यास कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इसके बाद दिन-रात मंदिर निर्माण कार्य चलता रहा और श्रद्धा पत्थरों में आकार लेने लगी।आज मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है। विशाल शिखर, पाषाण कला, दिव्य नक्काशी और स्वर्णिम गर्भगृह श्रद्धालुओं को प्राचीन भारतीय जैन स्थापत्य की गौरवशाली परंपरा का अनुभव कराते हैं।
स्वर्ण आभा से आलोकित होगा गर्भगृह मंदिर में भगवान
महावीर स्वामी की मुख्य वेदी को विशेष स्वर्ण आभा से सजाया गया है। गर्भगृह में भगवान महावीर स्वामी के साथ भगवान आदिनाथ, पारसनाथ भगवान, नंदीश्वर द्वीप, मुनि सुदृढ़नाथ सहित 9 देवताओं की धात एवं पाषाण निर्मित प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी।रात के समय मंदिर की रोशनी पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक प्रकाश बिखेरती दिखाई देगी। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह जिनालय आने वाले समय में क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक तीर्थ बनेगा।
गांव बनेगा धर्मनगरी, बैंड-बाजों के साथ निकलेगी शोभायात्रा
17 एवं 18 मई को पूरे नई राज्यास गांव को आकर्षक विद्युत सजावट, धर्मध्वजाओं और रंग-बिरंगी झांकियों से सजाया जाएगा। गांव की गलियों से लेकर मंदिर परिसर तक हर ओर भक्तिमय वातावरण रहेगा।महोत्सव के दौरान बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर भगवान की भक्ति में लीन नजर आएंगे। साथ ही धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा तथा पूरे गांव के लिए विशाल सामूहिक प्रसादी और वात्सल्य भोज रखा जाएगा।
देशभर से पहुंचेंगे संत और विशिष्ट अतिथि…
यह ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के आशीर्वाद, मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर महाराज के मार्गदर्शन एवं प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश के सानिध्य में सम्पन्न होगा।
कार्यक्रम में शाहपुरा-बनेड़ा विधायक डॉ लालाराम बैरवा, मसूदा विधायक वीरेन्द्र सिंह कानावत, पूर्व जिला प्रमुख पूखराज पहाड़िया, ग्राम सरपंच सत्यानारायण भील सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे।
वहीं वेद स्टोनेक्स किशनगढ़ के दिलीप कुमार, निरंजन, निर्मल , प्रमोद वेद, देशनोदय दिगम्बर अतिशय क्षेत्र चांवलेश्वर पार्श्वनाथ के अध्यक्ष प्रकाश चन्द्र कासलीवाल तथा सर्वार्थ सिद्ध अतिशय क्षेत्र रणथम्भौर, सवाई माधोपुर के तरुण बंज भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
श्री दिगम्बर जैन मंदिर के संरक्षक रतनलाल गोधा एवं अध्यक्ष भागचन्द गोधा, राजकुमार गोधा, कमल गोधा तथा शशि गोधा ने बताया कि यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि समाज की एकता, श्रद्धा और समर्पण का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वर्षों का सपना अब साकार हो रहा है और यह जिनालय आने वाली पीढ़ियों को धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की प्रेरणा देता रहेगा।
नई राज्यास आज उस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने जा रहा है, जहां मिट्टी से निकली दिव्यता पुनः धर्मध्वजा के साथ जगमगाने वाली है।
