पुनित चपलोत
भीलवाड़ा // जिले में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर बुजुर्ग दंपति को डरा-धमका कर लाखों रुपये हड़पने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का भीलवाड़ा साइबर थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में गुरुग्राम के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर अपराधी अनिल कुमार उर्फ नन्हे को गिरफ्तार किया है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते न केवल आरोपी सलाखों के पीछे पहुंचा, बल्कि ठगी गई राशि में से करीब 16.36 लाख रुपये बैंक खातों में होल्ड करवा दिए गए हैं, जिन्हें अब पीडित को वापस लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
साइबर थाना प्रभारी रामशरण ने कहा कि संजय कॉलोनी में रहने वाले प्रहलाद राय सोडाणी ने एक रिपोर्ट पेश की जिसमे उन्होंने बताया कि वो 2010 में भीलवाड़ा डेयरी के अकाउंटेंट के पोस्ट से रिटायर्ड हुए थे। उनके नंबर पर एक कॉल आई जिसमें बताया गया कि उनके आधार कार्ड से मुंबई में एक सिम कार्ड जारी हुआ है जिससे लड़कियों को अश्लील मैसेज भेजे गए हैं।उसके बाद से लगातार अलग-अलग नंबर से व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल करके सीबीआई, जज और पुलिस अधिकारी बनकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर लिया ओर उनके खाते से कुल 32 लाख 75 हजार रूपए अपने बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करवा लिए थे । इस पर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए टेक्निकल जांच से मुलजिम की पहचान की। विशेष टीम के द्वारा मुस्लिम की तलाश शुरू की गई और कई जगह दबिश देने के बाद आरोपी अनिल कुमार उर्फ नन्हे पिता लेखराज निवासी गुरुग्राम हरियाणा को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया हैं जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
पकड़ा गया आरोपी मामूली अपराधी नहीं, बल्कि गुरुग्राम के सेक्टर 9ए थाने का हिस्ट्रीशीटर है, जिसके खिलाफ पहले से ही 15 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड में उसे ‘बैड कैरेक्टर’ के रूप में दर्ज किया गया है।
पीड़ित ने बताया कि उसके मोबाइल पर मुंबई से एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने कहा कि उसके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर एक सिम कार्ड जारी किया गया है, जिससे महिलाओं और लड़कियों को अश्लील संदेश भेजे जा रहे हैं। आरोपी ने पीड़ित का आधार नंबर, नाम और पता भी बताया, जिससे वह घबरा गया।इसके बाद मुझे डिजिटल अरेस्ट में रखकर किसी को भी जानकारी नहीं देने की धमकी दी । यहां तक कि परिवार और बच्चों से भी बात करने से मना कर दिया गया। आरोपियों ने खुद को सरकारी अधिकारी बताते हुए भारत सरकार और सुप्रीम कोर्ट के नाम की फर्जी रसीदें भेजीं और कहा कि जांच पूरी होने के बाद 72 घंटे में राशि वापस कर दी जाएगी। डर और दबाव में आकर मैंने अलग-अलग आरटीजीएस के जरिए कुल 32 लाख 75 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। दो दिन रविवार होने के कारण संपर्क नहीं हो पाया। सोमवार को जब पीड़ित ने दोबारा फोन किया तो कॉल रिसीव नहीं हुई। इसके बाद मैंने अपने बच्चों को पूरी जानकारी दी। मामला ठगी का होने का पता चलने पर परिवार ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज करवाई।
