बानसूर।स्मार्ट हलचल|क्षेत्र के नीमूचाना गांव में गुरुवार को नीमूचाना नरसंहार को 101 वर्ष होने पर किसान शहीद दिवस मनाया गया। इस अवसर पर ग्रामीणों ने कैंडल मार्च निकालकर शहीद किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। गांव की मुख्य गलियों से गुजरे इस मार्च में बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा और बुजुर्ग शामिल हुए। ग्रामीणों ने बताया कि यह दिवस हर वर्ष 14 मई को मनाया जाता है। इस दिन गांव के लोग उन किसानों को याद करते हैं, जिन्होंने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे।
*1925 में किसानों ने दिया था बलिदान*
ग्रामीणों ने बाताया 14 मई 1925 को अलवर रियासत के कर लगान का विरोध कर रहे किसानों पर तत्कालीन हुकूमत ने गोलियां चलवा दी थीं। इस दौरान गांव में आग भी लगा दी गई थी, जिसमें लगभग 150 से अधिक किसानों की मृत्यु हो गई थी। इतिहास में इस घटना को “दूसरा जलियांवाला कांड” के नाम से भी जाना जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि नीमूचाना किसान आंदोलन किसानों के अधिकारों और उनके संघर्ष का प्रतीक है। शहीद किसानों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। कार्यक्रम के दौरान युवाओं को भी इस ऐतिहासिक घटना के बारे में जानकारी दी गई, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास और शहीदों के संघर्ष को याद रख सकें। कैंडल मार्च के समापन पर सभी ग्रामीणों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीद किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
