हेलमेट नहीं तो चालान तय, लेकिन मौत बन चुकी सड़क पर जिम्मेदार कौन? खबर छपते ही जागा विभाग, चेतावनी बोर्ड लगाकर हादसे के खतरे पर कर दी लीपापोती..

एनएच-148 डी पर अरनिया घोड़ा पुलिया का बढ़ता गड्ढा बना ‘मौत का मुहाना’, हर गुजरता वाहन खतरे में

चेतावनी बोर्ड,कट्टे और सेफ्टी टेप लगाकर जिम्मेदारी खत्म..?हाईवे जैसे व्यस्त मार्ग पर महज छोटे संकेत बोर्ड,लकड़ियों पर क्यूशन टेप बांध देना किसी बड़े हादसे को रोकने के लिए पर्याप्त माना जा सकता है,।।।

शाहपुरा@(किशन वैष्णव)जिले में सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों को लेकर अभियान चलाए जा रहे हैं। जगह-जगह वाहन चालकों के चालान काटे जा रहे हैं, हेलमेट और सीट बेल्ट की जांच हो रही है, लेकिन दूसरी तरफ राष्ट्रीय राजमार्गों की बदहाल स्थिति खुद बड़े हादसों को न्योता दे रही है।भीम-उनियारा एनएच-148 डी मार्ग पर कई जगह सड़क की हालत खराब है जहां आए दिन अनियंत्रित होकर वाहन चालक अन्य वाहनों से टकरा जाते हैं वही अरनिया घोड़ा नाले की पुलिया पिछले करीब दो माह से मौत के खतरे में तब्दील हो चुकी है..? लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक स्थायी समाधान नहीं कर पाया है।
स्थिति यह है कि पुलिया पर बना गहरा गड्ढा लगातार चौड़ा होता जा रहा है और नीचे बह रहे करीब 20 फीट गहरे नाले का पानी ऊपर से साफ दिखाई देने लगा है। पुलिया की सीमेंट-कंक्रीट परत टूट चुकी है और अंदर लगे लोहे के सरिए बाहर निकल आए हैं। ऐसे में कभी भी पुलिया का हिस्सा और धंसने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग जरूर हरकत में आया, लेकिन मरम्मत की जगह केवल चेतावनी बोर्ड, कट्टे और सेफ्टी टेप लगाकर जिम्मेदारी पूरी मान ली गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह सुरक्षा व्यवस्था केवल दिखावा बनकर रह गई है। हाईवे जैसे व्यस्त मार्ग पर महज छोटे संकेत बोर्ड लगाना और लकड़ियों पर क्यूशन टेप बांध देना किसी बड़े हादसे को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता। विशेषकर रात के समय तेज रफ्तार वाहनों को यह चेतावनी संकेत स्पष्ट दिखाई भी नहीं देते।

दिन-रात मौत के साये में गुजर रहे वाहन..

भीम-उनियारा एनएच-148 डी क्षेत्र का प्रमुख और व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग माना जाता है। इस मार्ग से दिन-रात भारी ट्रोले, बसें, निजी वाहन और दोपहिया वाहन गुजरते हैं। लगातार भारी वाहनों की आवाजाही से पुलिया पर दबाव बढ़ता जा रहा है और दरारें भी धीरे-धीरे चौड़ी होती दिखाई दे रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी मरम्मत नहीं हुई तो बरसात के दौरान पुलिया का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो सकता है, जिससे मार्ग अवरुद्ध होने के साथ बड़ा हादसा भी हो सकता है।
तीन महीने पहले हुआ डामरीकरण, फिर उखड़ गई सड़क
जानकारी के अनुसार करीब तीन महीने पहले ही पुलिया और सड़क पर डामरीकरण किया गया था, लेकिन कुछ ही समय में डामर की परत उखड़ गई और पुलिया दोबारा टूटने लगी। करोड़ों रुपये की लागत से करीब पांच से छह वर्ष पूर्व निर्मित इस पुलिया की गुणवत्ता पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य और मरम्मत दोनों में गुणवत्ता की अनदेखी की गई, जिसके चलते पुलिया समय से पहले जर्जर होती जा रही है।
सबसे ज्यादा खतरा रात और बरसात में
स्थानीय लोगों के अनुसार रात के समय यह पुलिया सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है। अंधेरे में गड्ढा स्पष्ट नजर नहीं आने से तेज रफ्तार वाहन अचानक असंतुलित हो सकते हैं। यदि कोई वाहन गड्ढे की तरफ मुड़ जाए तो सीधे करीब 20 फीट नीचे नाले में गिर सकता है। बरसात शुरू होने के बाद स्थिति और भयावह हो सकती है, क्योंकि पानी भरने पर गड्ढे की गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

“सड़क सुरक्षा” सिर्फ आमजन के लिए?

ग्रामीणों और वाहन चालकों में विभागीय कार्यशैली को लेकर भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल आम वाहन चालकों के चालान काटने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जब राष्ट्रीय राजमार्ग पर ही जानलेवा गड्ढे खुले पड़े हों, पुलिया टूट रही हो और सड़कें जगह-जगह क्षतिग्रस्त हों, तब सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे खोखले नजर आते हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि किसी हादसे में किसी की जान जाती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
ग्रामीणों ने दी चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन और एनएचएआई से पुलिया की तत्काल स्थायी मरम्मत करवाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यह पुलिया किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती है। फिलहाल विभाग चेतावनी बोर्ड लगाकर अपनी जिम्मेदारी से बचता नजर आ रहा है, जबकि मौत का खतरा हर गुजरते वाहन के साथ बढ़ता जा रहा है।