टोंक में सदर थाना पुलिस कार्रवाई पर बवाल-महिलाओं से बदसलूकी व युवक की “जबरन गिरफ्तारी” के आरोप, विरोध पर राजकार्य में बाधा का मुकदमा दर्ज

सुनेला-हाजीपुरा गांव में शुक्रवार देर शाम हुई कार्रवाई से मचा हड़कंप,पुलिस-परिजनों के आरोप-प्रत्यारोप से गरमाया मामला

शिवराज बारवाल मीना
टोंक। स्मार्ट हलचल|जिले के सदर थाना क्षेत्र के सुनेला-हाजीपुरा गांव में पुलिस कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शुक्रवार, 15 मई 2026 की शाम करीब 7 बजे के लगभग पुलिस द्वारा एक युवक को कथित अवैध हिरासत में लेने के दौरान मौके पर जमकर हंगामा हो गया। परिजनों ने पुलिस पर बिना स्पष्ट कारण घर परिसर व खेत क्षेत्र में घुसने, महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की करने तथा युवक को जबरन थाने ले जाने का आरोप लगाया है।
परिजनों के अनुसार सदर थाना पुलिस गांव सुनेला में बद्रीलाल गुर्जर के घर पहुंची थी, जहां उसके पुत्र फौजीराम गुर्जर को बिना वारंट और बिना स्पष्ट कारण बताए थाने ले जाने का प्रयास किया गया। आरोप है कि फौजीराम ने पुलिस से सवाल करते हुए गिरफ्तारी का आधार, संबंधित प्रकरण की जानकारी और वारंट दिखाने की मांग की, लेकिन जवाब देने के बजाय पुलिसकर्मियों ने उसके साथ गाली-गलौच और हाथापाई शुरू कर दी।
*महिलाओं से अभद्रता के आरोप*
घटना के दौरान फौजीराम गुर्जर की बहिन, मां और भाई राहुल गुर्जर ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। परिजनों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए धक्का-मुक्की की। आरोपों के मुताबिक सिपाही लखपत सिंह चौधरी (662) और संपत राम देवनिया (1069) ने फौजीराम गुर्जर की बहिन के साथ हाथ पकड़कर कई बार धक्का-मुक्की की, जो घटना वायरल वीडियो में भी सामने आ रही हैं। जबकि एएसआई राजाराम केवट, सिपाही धर्मेंद्र कुमार (1155), महबूब खान (380), रूपकिशोर शर्मा (1146) पर भी बदसलूकी व गालीगलौच के आरोप लगाए गए हैं। घटना के दौरान ग्रामीणों की काफी भीड़ जमा हो गई और लोगों द्वारा पूरे घटनाक्रम के वीडियो भी बनाए गए।परिजनों का दावा है कि वीडियो में पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी कहासुनी तथा विवाद स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
*“अवैध चौथ वसूली” को लेकर भी लगाए आरोप*
परिवार सहित ग्रामीणों ने पुलिस पर बजरी खनन व परिवहन को लेकर अवैध चौथ वसूली के गंभीर आरोप भी लगाए जो वीडियो में स्पष्ट सुनाई दे रहे हैं। पुलिस पर आरोप लगाया कि युवक फौजीराम गुर्जर पहले अपने मामा तुलसीराम गुर्जर के ट्रैक्टर पर चालक था, जो बजरी परिवहन कार्य से जुड़ा हुआ था।पूर्व में साल जनवरी 2025 में पुलिस द्वारा ट्रैक्टर पकड़े जाने के बाद से दुबारा से बजरी परिवहन को लेकर पुलिसकर्मी उस पर दबाव बना रहे थे। जबकि 15 मई से पूर्व फ़ौजीराम गुर्जर किसी भी मामले में वांछित आरोपी नहीं है। वर्तमान परिजनों ने कुछ स्थानीय लोगों और पुलिस से सांठगांठ के चलते झूठी शिकायत करके फंसाने का षड्यंत्र रचा गया है तथा कथित “एंट्री वसूली” की मांग का दबाव बनाने को लेकर रंजिश का आरोप लगाया है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
*विरोध व आरोपों के बाद दर्ज हुआ मुकदमा*
पुलिस के अनुसार 15 मई 2026 की घटना के अगले दिन शनिवार, 16 मई को सदर टोंक थाना पुलिस ने युवक फौजीराम गुर्जर, उसके भाई राहुल गुर्जर और उसकी मां के खिलाफ एफआईआर संख्या 133/2026 दर्ज कर बीएनएस की धारा 126(2), 132 और 221 के तहत मारपीट व राजकार्य में बाधा डालने का मामला दर्ज किया है। परिवार का कहना है कि यह मुकदमा पुलिस द्वारा “बचाव” में दर्ज किया गया झूठा प्रकरण है।
*पुलिस का पक्ष*
मामले में पुलिस का कहना है कि युवक फौजीराम गुर्जर बजरी माफियाओं के लिए पुलिस की रेकी करने का काम करता हैं। पुलिस के अनुसार घटना के दिन कुछ बजरी के ट्रैक्टरों की सूचना पर पीछा किया जा रहा था और युवक ने बाइक रास्ते में लगाकर ट्रैक्टरों को भगाने तथा पुलिस जाप्ते पर ट्रैक्टर चढ़ाने के प्रयास के आरोप हैं। पुलिस ने चौथ वसूली के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ राजकार्य में बाधा पहुंचाने का मामला दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
*पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल-विरोधाभास भी आया सामने*
घटना के बाद ग्रामीणों में पुलिस कार्रवाई को लेकर नाराजगी और चर्चा का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिस वैध कार्रवाई के तहत युवक को हिरासत में लेने पहुंची थी तो गिरफ्तारी का कारण और कानूनी आधार स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए था। वहीं महिलाओं से कथित अभद्रता और महिला पुलिसकर्मी की अनुपस्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं आरोप हैं कि पुलिस द्वारा घटना का समय भी गलत दिखाया गया है, जिससे पुलिस की कार्यवाही में कई विरोधाभास की स्थिति साफ नजर आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर अवैध बजरी परिवहन जैसी कोई स्थिति नहीं थी और पुरानी रंजिश के चलते युवक पर दबाव बनाया जा रहा था। हालांकि पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया है। फिलहाल मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। पीड़ित परिवार ने देवली-उनियारा विधायक राजेंद्र गुर्जर से मिलकर जिला पुलिस अधीक्षक टोंक व सदर थाना पुलिस को मामले से अवगत कराया हैं। प्रकरण की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।