भरत देवड़वाल
पांचना गुडला संघर्ष समिति ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रखीं 4 प्रमुख मांगें
जयपुर-करौली/ स्मार्ट हलचल।ग्रामोत्थान संस्था एवं पांचना गुडला संघर्ष समिति ने पिंक सिटी प्रेस क्लब जयपुर में प्रेस कांफ्रेंस जारी कर राजस्थान सरकार से 20 वर्षों से बंद पांचना बांध की नहरों में तुरंत पानी खोलने की मांग की है। संस्था ने माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालना नहीं होने पर रोष व्यक्त किया।
*मुख्य बिंदु:*
1. *बांध का परिचय:* करौली जिले में वर्ष 1977 से 2004 के दौरान ₹125 करोड़ की लागत से बने पांचना बांध की क्षमता 2100 मिलियन क्यूबिक फीट है। इससे करौली व सवाई माधोपुर के 35 गांवों की 9985 हेक्टेयर भूमि सिंचित होनी थी। वर्ष 1992 से 2005 तक 13 साल नहरों में पानी चला, लेकिन 2006 से नहरें बंद हैं।
2. *हाईकोर्ट के आदेश:* माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय ने 8 जुलाई 2022 को आदेश दिया कि “पांचना बांध में बने हुए सिंचाई सिस्टम को संचालित करके नहरों में पानी छोड़ा जाए”। 23 अप्रैल 2026 के आदेश में कोर्ट ने कहा कि “मौजूदा नहरों में तुरंत पानी छोड़ा जाए, जहां पानी नहीं पहुंचा वहां लिंक नहर का निर्माण किया जाए”। सरकार को 3 सप्ताह का अंतिम समय दिया गया। अगली सुनवाई 26 मई 2026 को है।
3. *वर्तमान स्थिति:* बांध में 1500 MCFT से अधिक पानी उपलब्ध है, फिर भी नहरें बंद हैं। 2022 से 2025 तक 4 फसल सीजन में बांध भरने के बावजूद पानी नहीं छोड़ा गया। प्रशासन की उदासीनता से 40000 बीघा भूमि असिंचित है, जिससे किसानों को प्रतिवर्ष ₹200 करोड़ से अधिक का नुकसान हो रहा है। 20 वर्षों में नुकसान ₹4000 करोड़ से अधिक हो चुका है।
4. *महापंचायत:* 15 मई 2026 को पांचना गुडला संघर्ष समिति के तत्वावधान में महापंचायत हुई, जिसमें बांध के आसपास व दूर-दराज के गांवों के लोगों ने भाग लिया। महापंचायत में हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना पर रोष व्यक्त किया गया।
*सरकार से प्रमुख मांगें:*
1. माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालना में कमांड एरिया की नहरों में तुरंत पानी खोला जाए।
2. नहरों में पानी खोलने के विरोध में उपद्रव करने वालों की पहचान कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
3. 20 वर्षों से नहरें बंद रखने के लिए दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
4. 20 वर्षों में कमांड एरिया के किसानों को असिंचित रहने के कारण हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाए।
ग्रामोत्थान संस्था ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर सिंचाई विभाग ने नहरों की मरम्मत व सफाई करवा दी है तथा स्लुइस गेटों को ऑपरेशनल कर दिया है। इसके बावजूद पानी नहीं छोड़ा जा रहा। भीषण गर्मी में नागरिक, पशु व पक्षियों को पानी की किल्लत हो रही है। सक्षम लोग टैंकरों से पानी खरीदकर डाल रहे हैं, गरीबों की दशा खराब है।
