पवन बावरी
भीलवाड़ा। शहर के हृदय स्थल कहे जाने वाले नेहरू उद्यान की हालत बद से बदतर हो चुकी है। झुकी और ध्वस्त हुई दीवारें नगर विकास न्यास के रखरखाव की पोल खोल रही हैं। टूटे झूले और फैली अव्यवस्था जिम्मेदार अधिकारियों की मॉनिटरिंग पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
कभी शहर की सुंदर जगहों में शुमार नेहरू पार्क अब कबाड़ और टूटी दीवारों में तब्दील हो गया है। उद्यान में स्थित धांधोलाई तालाब, जिसे धर्म तलाई के नाम से भी जाना जाता है, नालों का गंदा पानी इकट्ठा होने से दूषित होकर बदबू मार रहा है।
गर्मी की छुट्टियों में भी बच्चों की पसंदीदा टॉय ट्रेन ना के बराबर चलती है, जिससे पार्क में आने वालों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों से लगातार गिरावट आई है। लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए झूले टूट चुके हैं और फव्वारे बंद पड़े हैं।
पार्क जगह-जगह शराब की बोतलों और असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है। कॉलोनीवासियों द्वारा कई बार पुलिस को अवगत कराने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बारिश में पानी भर जाने से जंगली जीव-जंतुओं का खतरा भी बना रहता है। असामाजिक तत्वों के डर से आम लोग पार्क में आने से कतराने लगे हैं।
विधायक ने लिया संज्ञान, अधिकारियों पर जताई नाराजगी
विधायक अशोक कोठारी ने पार्क का निरीक्षण कर राज्य सरकार को अवगत कराया था। इसके बाद सरकार ने 18 करोड़ रुपये की लागत से नेहरू उद्यान के नवनिर्माण को मंजूरी दी है।
विधायक कोठारी ने कहा, “भीलवाड़ा के हृदय स्थल कही जाने वाली नेहरू तलाई का विकास अब बहुत जरूरी हो गया है। आने वाले समय में यह तलाई आधुनिक स्वरूप में नजर आएगी। पर्यटन की दृष्टि से पार्क का डेवलपमेंट किया जाएगा, जिससे शहर को नई पहचान मिलेगी।”
उन्होंने अधिकारियों पर नाराजगी जताते हुए कहा, “यदि समय पर इस पार्क का रखरखाव किया गया होता तो आज हालात इतने खराब नहीं होते। भीलवाड़ा के विकास के लिए नगर निगम और नगर विकास न्यास को सही ढंग से काम करना बेहद जरूरी है।”
यूआईटी ने बताया- दो साल में पूरा होगा काम
नगर विकास न्यास के अधिशासी अभियंता रामप्रसाद जाट ने बताया कि यूआईटी द्वारा “री-डेवलपमेंट एंड ब्यूटीफिकेशन ऑफ नेहरू तलाई एंड राजीव गांधी उद्यान” नाम से एक संयुक्त प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इसकी कुल लागत लगभग 18 करोड़ रुपये है।
उन्होंने कहा, “इस कार्य को पूरा होने में दो वर्ष का समय लगेगा। टेंडर हो चुके हैं और दर स्वीकृति के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जा चुका है। आदेश मिलते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा।”
जाट ने बताया कि पाल की दीवारों की मरम्मत की जाएगी, अलग से पार्किंग सुविधा विकसित होगी और बच्चों की टॉय ट्रेन के रूट में गुफा का निर्माण होगा। पटरियों और टूटे झूलों की मरम्मत कराई जाएगी। धांधोलाई तालाब का भी जीर्णोद्धार किया जाएगा।
बड़ा सवाल- रखरखाव का पैसा कहां गया?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि राज्य सरकार प्रतिवर्ष पार्कों के रखरखाव पर लाखों रुपये खर्च करती है, फिर भी हालात जस के तस हैं। लोगों का कहना है कि ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से नेहरू उद्यान की यह हालत हुई है।
18 करोड़ की लागत से होने वाले नवनिर्माण के बाद नेहरू उद्यान के नए रूप में लौटने की उम्मीद है।
