सोशल मीडिया पर चल रही राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट की दुकान की बिक्री के संबंध में चर्चा. श्री राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट ने मीडिया के समक्ष रखा अपना पक्ष

रणवीर सिंह चौहान

भवानी मंडी- स्मार्ट हलचल /शहर के प्रतिष्ठित श्री राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट की हाल ही में बिक्री की गई दुकान पर सोशल मीडिया के माध्यम से उठे विवाद और मंदिर ट्रस्ट के सदस्य दामोदर कचोलिया द्वारा इस पर खुलकर असहमति जताने के बाद मंदिर ट्रस्ट ने संज्ञान लेते हुए सभी मीडिया कर्मियों को बुलाकर ट्रस्ट पदाधिकारियों ने अपना पक्ष रखा। विगत 19 मई को राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट की एक दुकान का विक्रय के संबंध में भवानी मंडी कस्बे में सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थी ट्रस्ट द्वारा मंदिर संपत्ति का बेचान पर लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर तरह-तरह के तर्क दिए जा रहे थे इस पर राधेश्याम मंदिर ट्रस्ट द्वारा एक प्रेस वार्ता में मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष कृष्ण कुमार राठी ने बताया कि जो दुकान हमने बेची है वह नियमानुसार बेचकर उसका पैसा मंदिर ट्रस्ट में ही जमा है। राठी ने कहा कि हमने देवस्थान विभाग की अनुमति से इसे नियमानुसार बेचा है और ट्रस्ट को अधिकार है कि आवश्यकता होने पर सम्पत्ति बेची जा सकती है क्योंकि अभी ट्रस्ट की श्री राधेश्याम बगीची में निर्माण कार्य चल रहा और उसके लिए पैसों की आवश्यकता थी तो ट्रस्टियों की सहमति से नियमानुसार इसे बेचा गया है। प्रेस वार्ता में राठी ने बताया कि विगत दस वर्षों में मंदिर ट्रस्ट ने मंदिर व मंदिर धर्मशाला का जीर्णोद्धार करवाया। बगीची में भी निर्माण कार्य चल रहा है और कई दुकानों को मुक्त करवाकर नए सिरे से दिया गया है एवं कुछ सम्पत्तियां कब्जा हटवाकर मंदिर ट्रस्ट में लाई गई। मंदिर में अब समय समय पर कई धार्मिक आयोजन होते हैं जो पहले नहीं होते थे और इससे शहर में नई धार्मिक चेतना आई है। राठी ने कहा कि मंदिर ट्रस्ट की स्टेशन रोड स्थित जिस दुकान का विक्रय किया गया है उसका दुकानदार से पिछले तीन वर्षों से खाली करने अथवा सुरक्षा निधि मंदिर ट्रस्ट की नई नीति अनुसार सुरक्षा निधि मंदिर में जमा करने हेतु व किराया बढ़ाने के लिए कहा जा रहा था लेकिन दुकानदार मंदिर की दुकान पर अनाधिकृत कब्जा कर बैठा था। राठी ने कहा कि एग्रीमेंट करीब 3 साल पहले खत्म हो चुका है ओर उसके बाद नया किराया नामा नहीं बना है। लंबे समय से विवाद और बकाया स्थिति बने रहने के कारण ट्रस्ट ने नियमानुसार दुकान विक्रय का निर्णय लिया।
उन्होंने बताया कि दुकान विक्रय से प्राप्त राशि मंदिर ट्रस्ट के खाते में जमा कराई गई है तथा इस राशि का उपयोग मंदिर के विकास कार्यों, व्यवस्थाओं के सुधार एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार में किया जाएगा।
प्रेस वार्ता में ट्रस्ट के अन्य सदस्यों द्वारकादास पोरवाल, बालकिशन गुप्ता और पुरुषोत्तम पालीवाल ने कहा कि पिछले वर्षों में मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियों एवं राधेश्याम बगीची के विकास को लेकर लगातार कार्य किए गए हैं और आगे भी अनेक योजनाओं पर कार्य किया जाएगा ताकि ट्रस्ट की प्रतिष्ठा और धार्मिक पहचान को और मजबूत बनाया जा सके।
ट्रस्ट अध्यक्ष कृष्ण कुमार राठी ने यह भी जानकारी दी कि मंदिर ट्रस्ट की कुछ अन्य संपत्तियों एवं दुकानों पर भी कुछ लोगों द्वारा कब्जा किया गया है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का उद्देश्य मंदिर की सभी संपत्तियों को कब्जा मुक्त कराना एवं उन्हें धार्मिक एवं सार्वजनिक हित में उपयोग करना है। बैठक में उपस्थित सदस्यों ने ट्रस्ट की संपत्तियों की सुरक्षा एवं विकास कार्यों को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई। वहीं इस विवाद पर दुकानदार सुरेश लड्डा ने मीडिया को बताया कि वो ऑन लाइन किराया जमा कर रहा है लेकिन इस पर मंदिर ट्रस्ट से जानकारी चाही तो ट्रस्ट अध्यक्ष केके राठी ने बताया कि इस बारे में हमे कोई जानकारी नहीं है और ना उसने हमसे इस बारे में कोई बात कर जानकारी भी नहीं दी है। राठी ने कहा कि ऑन लाइन मंदिर में कई लोग दान स्वरूप राशी दान करते हैं लेकिन दुकानदार ने मंदिर ट्रस्ट को अवगत नहीं कराया ओर ना ही कभी किराया जमा करने की रसीद लेने आया । राठी ने प्रेस वार्ता में बताया कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है कि मंदिर ट्रस्ट की संपत्ति पूर्व में भी बिकी है पत्रकारों द्वारा यह पूछने पर यह एक गलत परिपाटी तो नहीं पड़ जाएगी इस पर वहा उपस्थित ट्रस्ट के सदस्यों ने कहा ट्रस्ट द्वारा जो संपत्ति खरीद की गई है ट्रस्ट उसी का बेचान कर सकता है दान में दी गई संपत्ति का बेचान नहीं होता है