बालश्रम और बाल तस्करी के खिलाफ राजस्थान पुलिस का बड़ा अभियान

1 जून से 30 जून तक चलेगा विशेष अभियान “उमंग-VII”, डीजीपी राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर प्रदेशभर में होगी सघन कार्रवाई

जयपुर ,27 मई। स्मार्ट हलचल।राजस्थान में बालश्रम, बाल बंधुआ मजदूरी एवं मानव दुर्व्यापार (बाल तस्करी) के खिलाफ राज्यव्यापी एक माह का विशेष अभियान “उमंग-VII” चलाया जाएगा। पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार यह अभियान 1 जून से 30 जून 2026 तक प्रदेशभर में संचालित होगा। अभियान का उद्देश्य बालश्रम एवं बाल तस्करी जैसी गंभीर सामाजिक बुराइयों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना तथा पीड़ित बच्चों का पुनर्वास सुनिश्चित करना है।

इस संबंध में अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (सिविल राइट्स एवं एएचटी) हवासिंह घुमरिया ने प्रदेश के समस्त पुलिस आयुक्तों, रेंज आईजी, पुलिस उपायुक्तों एवं जिला पुलिस अधीक्षकों सहित जीआरपी अजमेर एवं जोधपुर को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश में अभियान को पूरी संवेदनशीलता एवं समन्वय के साथ संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।

*जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त*

अभियान के प्रभावी संचालन के लिए प्रत्येक जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है । जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वे अभियान से जुड़े सभी विभागों एवं हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित करें। इसके तहत सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग, बाल अधिकारिता विभाग, बाल कल्याण समिति, शेल्टर होम, चिल्ड्रन होम तथा विभिन्न गैर सरकारी संगठनों के साथ बैठक आयोजित कर संयुक्त रणनीति तैयार की जाएगी।

*थानेवार रेस्क्यू टीमें होंगी गठित*

पुलिस मुख्यालय ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक जिले में थानेवार विशेष रेस्क्यू टीमों का गठन किया जाए। प्रत्येक टीम में एक एसआई अथवा एएसआई सहित चार पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। इन टीमों को अभियान शुरू होने से पहले विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि बालश्रम एवं मानव तस्करी के मामलों की पहचान और कार्रवाई प्रभावी ढंग से हो सके।
इन टीमों में महिला एवं बाल विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग, बाल अधिकारिता विभाग, बाल कल्याण समिति तथा एनजीओ प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा, जिससे रेस्क्यू और पुनर्वास कार्य अधिक संवेदनशील एवं समन्वित रूप से किया जा सके।

*ढाबों, फैक्ट्रियों, होटलों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में होगी स्क्रीनिंग*

विशेष अभियान के दौरान होटल, ढाबे, ईंट भट्टे, फैक्ट्रियां, रेलवे प्लेटफॉर्म, बस स्टैंड, धार्मिक स्थल, हाईवे किनारे स्थित ढाबों तथा अस्थायी बस्तियों में रह रहे बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने निर्देश दिए हैं कि ऐसे बच्चों की पहचान कर उनका पूरा विवरण, फोटोग्राफ एवं आवश्यकता अनुसार वीडियोग्राफी भी की जाए।
यदि कोई बच्चा गुमशुदा अथवा मानव तस्करी का शिकार पाया जाता है तो उसके संबंध में तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुक्त कराए गए बच्चों का मेडिकल परीक्षण करवाया जाएगा तथा जरूरत पड़ने पर उनकी मानसिक स्थिति का भी परीक्षण कराया जाएगा।

*चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे बच्चे*

रेस्क्यू किए गए बच्चों को संबंधित चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही बच्चों के माता-पिता एवं परिजनों की जानकारी जुटाकर उन्हें परिवार से पुनः मिलाने के प्रयास किए जाएंगे। अन्य राज्यों से लाए गए नाबालिग बच्चों के मामलों में संबंधित राज्य एवं स्थानीय थानों को भी तत्काल सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।

*मानव तस्करी गिरोहों पर होगी कड़ी कार्रवाई*

पुलिस मुख्यालय ने विशेष रूप से निर्देश दिए हैं कि बालश्रम एवं बाल तस्करी के पीछे सक्रिय संगठित गिरोहों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। बच्चों के रात्रि निवास स्थलों की भी जांच की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं कोई संगठित गैंग तो सक्रिय नहीं है।
यदि मानव तस्करी से जुड़े मामले सामने आते हैं तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 143, 144, 145, 146, 98 एवं 99 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 75 एवं 79 तथा बालश्रम प्रतिषेध अधिनियम 1986 के प्रावधानों के तहत भी सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

*डीजीपी का स्पष्ट संदेश : बच्चों के शोषण पर जीरो टॉलरेंस*

पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि बालश्रम, बाल बंधुआ मजदूरी एवं बाल तस्करी जैसे अपराधों के खिलाफ राज्य सरकार और राजस्थान पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति है। अभियान “उमंग-VII” के माध्यम से न केवल बच्चों को शोषण से मुक्त कराया जाएगा, बल्कि अपराधियों और संगठित गिरोहों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।

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