भाजपा सरकार के सहकारिता मंत्री की पुलिस को 3 मिनिट में 17 गालियां,कहा तेरी पत्नी को सुला दे 20 हजार दे देंगे

खाकी को दी माँ बहन की गलियां, कहा तेरी पत्नी को सुला दे 20 हजार दे देंगे।

ओम जैन

शंभूपुरा।स्मार्ट हलचल।भाजपा की डबल इंजन सरकार में सीएम भजनलाल शर्मा के मंत्री विधायक अपने स्तर से कितने गिर सकते हैं यह तो हाल ही में सहकारिता मंत्री गौतम दक की वायरल ऑडियो ही बता रही है।
बात कर रहे हैं राजस्थान सरकार के सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक द्वारा एक कांस्टेबल को 3 मिनट में धनाधन दी गई 17 गालियों की। सोशल मीडिया पर सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक का एक ऑडियो तेजी से वाइरल हो रहा है जिसमें वो डुंगला थाने के कांस्टेबल को अपनी पार्टी के कार्यकर्ता का काम नहीं करने, कार्यकर्ता के लट्ठ बजाने और एक कार्यकर्ता की गाड़ी के पास जाने या चेक करने की वजह से धनाधन गालियाँ देते नजर आ रहे हैं और ऑन ड्यूटी पुलिसकर्मियों को उसका इलाज करने तक की भी धमकी दे रहे हैं।
एक नेता का अपनी पार्टी के कार्यकर्ता के प्रति ये प्यार देखकर काफी अच्छा लगता है पर दूसरी तरफ सरकार के जिम्मेदार पद पर होने के नाते एक अधिकारी से इस तरह की भाषा में बात करना कही से कही तक शोभनीय नहीं हैं।
बड़ी सादड़ी के डूंगला थाना के पुलिसकर्मियों से सहकारिता मंत्री गौतम दक की बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस बातचीत में मंत्री बात कम कर रहे हैं और गालियां ज्यादा दे रहे हैं। ओर वो भी ऐसी भद्दी गालियां जो सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हैं, जबकि खुद मंत्री दक जैन समाज से आते है जहाँ अहिंसा परमो धर्म के सिद्धांत पर चलने का मार्ग बताया जाता है लेकिन वायरल ऑडियो से तो लग रहा मंत्री दक राजनीति के नशे में समाज ओर समाज का बताया मार्ग तक भूल गए। सहकारिता मंत्री की ऐसी भाषा चौंकाती भी है और शर्मिंदा भी करती है। मंत्री को ऐतराज है कि कांस्टेबलों ने उनके कार्यकर्ता को धमका कर वसूली की, लिहाजा मंत्री का गुस्सा जायज है, लेकिन थानेदार के सामने पुलिसकर्मियों को मंत्री की गालियों वाली भाषा पर भी ऐतराज जरूरी है। वे राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन्हें यह शोभा नहीं देता।
दरअसल मंत्री दक सोमवार को डूंगला थाने पहुंचे थे। एसएचओ शैतान सिंह, कांस्टेबल लक्ष्मीनारायण और विष्णु को बाहर बुलाया। दक ने एसएचओ व कांस्टेबलों से बातचीत की शुरुआत ही गालियों से की। वे हर वाक्य से पहले गालियां देते रहे। 3 मिनट की रिकॉर्डिंग में 17 गालियां देकर अपने नाम बेशमी का नया रिकॉर्ड बना बैठे, जिससे स्वयं के पद के साथ साथ उन्होंने जैन समाज ओर भाजपा तक कि साख को दांव पर लगा दिया। वे कार्यकर्ता के यहां पुलिस के पहुंचने से खफा थे। आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी ने उससे पैसे मांगे। मंत्री इतनी गालियां निकालते रहे कि तीनों को बोलने का मौका ही नहीं दिया। इस बातचीत को वहां खड़े किसी व्यक्ति ने रिकॉर्ड कर लिया, जिसके वायरल होते ही अब भाजपा की साख पर भी सवाल उठ रहे कि क्या मंत्री दक भाजपा की रीतिनीति को भी भूल गए, या फिर उन्हें समाज और पद एव खाकी की मर्यादा का भी भान नही रहा।

एफएसएल जांच की उठने लगी मांग

जैसे ही मंत्री दक का यह ऑडियो वायरल हुआ तो मामले से बचने के लिए मंत्री ने हर तरफ स्टेटमेंट जारी कर दिया कि ऑडियो में सुनाई दे रही आवाज मेरी नही है, जबकि पूरी ऑडियो साफ साफ पूरे मामले का खुलासा कर रही है, अब उनके इस स्टेटमेंट के बाद कोंग्रेस पार्टी के साथ साथ उन्ही की पार्टी के दर्जनों कार्यकर्ता और जैन समाज से भी कही लोग इस ऑडियो कि एफएसएल जांच की मांग कर रहे है ताकि दूध का दूध ओर पानी का पानी हो सके।

मंत्री ने वर्दी को किया किया शर्मसार, विभाग में भी जबरदस्त आक्रोश

जिले में पिछली सरकार में विधूड़ी एव एसएचओ गुर्जर मामले के बाद दूसरा ऐसा मामला यह सामने आया जिसने शर्म ओर मर्यादा की सारी हदें लांग दी जिससे यह मामला ना सिर्फ अब जिलेभर में बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया, साथ ही जनता में अब यह संदेश भी चला गया कि जनता सत्ता बदल सकती है लेकिन नेताओ की फिदरत नही। दूसरी ओर पुलिस को माँ बहन तक कि गन्दी गालियां देना, अपनी पत्नी को 20 हजार के लिए सुला देने जैसी अमर्यादित ओर अशोभनीय बात पुलिसकर्मी को सबके सामने कहना कही ना कही इंसानियत के साथ साथ खाकी को भी लज्जित किया है, जिससे जिलेभर में पुलिसकर्मियों में खासा रोष है, कई पुलिसकर्मियों से बात हुई तो उन्होंने दबी जुबान अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि हम हमारे पुलिस अधीक्षक के निर्णय का इंतजार कर रहे है बाद में जरूरत पड़ी तो मंत्री को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हर सम्भव कदम उठाने हेतु हम सब तैयार बैठे है।
आज सबसे बड़ा प्रशन यही हैं कि क्या सहकारिता मन्त्री गौतम कुमार दक वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ ओर ऐसे हर अधिकारी के खिलाफ ऐसे ही स्टिक है अगर है तो जयदेव देवल जिसपर कई आरोप होने के बावजूद क्यो पनाह देकर रखी, क्यो अपने ही कार्यकर्ता के पिता लसड़ावन निवासी कारुंडा के भूतपूर्व व्यवस्थापक पारस मल जैन की सही जांच करवाकर उन्हें अब न्याय नही दिला पाए तो उनकी सही जांच करवा न्याय दिलवाएंगे या छोटे मोटे कांस्टेबल से इस तरह की भाषा शैली में बात करके जनता से सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के प्रयास करते रहेंगे..?

इन्होंने यह कहा

-मामले को लेकर बड़ीसादड़ी से पूर्व विधायक प्रकाश चौधरी ने कहा कि मैने भी यह मामला अखबार में पढ़ा मंत्री दक ने ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया तो यह बहुत अमर्यादित है, अगर पुलिसकर्मी ने भी जैसा वो बता रहे वैसा किया तो गलत है, लेकिन मंत्री को ऐसी भाषा का इस्तेमाल करने की बजाय सिस्टम से उसे कही अन्यत्र ट्रांसफर या एपीओ करवा सकते थे, सिस्टम से जो बनती कार्यवाही करवा सकते थे लेकिन ऐसा करना कही से कही तक उचित नही है।

-भाजपा जिलाध्यक्ष रतनलाल गाडरी ने भी मामले से पल्ला झाड़ते हुए यह कह कर इतिश्री कर ली कि मैने कुछ देखा ही नही, मुझे तो कुछ पता ही नही है।