निर्वाचन आयोग के इस औचक कदम से प्रशासनिक हल्कों में मची खलबली; बाड़ेबंदी और चुनावी तैयारियों में जुटे राजनेताओं के समीकरण गड़बड़ाए
चुनाव दोबारा टलने की सुगबुगाहट तेज:
आयोग द्वारा ऐन वक्त पर आरक्षण के नए आंकड़े मांगे जाने के बाद से ही सियासी गलियारों में चुनाव दोबारा टलने की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। जानकारों का मानना है कि नए आंकड़ों के सत्यापन और उनके आधार पर सीटों के नए निर्धारण में प्रशासनिक स्तर पर अच्छा-खासा समय लग सकता है, जिससे चुनावी प्रक्रिया आगे खिसकना तय माना जा रहा है।
प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल बढ़ी:
इस नए मोड़ के बाद उन उम्मीदवारों में मायूसी और चिंता की लहर है जो लंबे समय से धरातल पर चुनावी तैयारियों में जुटे हुए थे। राज्य सरकार के संबंधित विभागों में अब आरक्षण की नई सूचियां और डेटा तैयार करने को लेकर कसरत तेज हो गई है। आयोग के इस फैसले के बाद अब आगामी दिनों में ही साफ हो पाएगा कि मरूधरा में लोकतंत्र के इस जमीनी पर्व का बिगुल आखिरकार कब फुंकेगा।
