वंदे गंगा अभियान के तहत मीडिया ने देखे नागौर के जल संरक्षण मॉडल, पारंपरिक स्रोतों की उपयोगिता से हुए रूबरू

एजाज़ अहमद उस्मानी।

नागौर। स्मार्ट हलचल।राजस्थान सरकार के निर्देशानुसार संचालित “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” के अंतर्गत बुधवार को सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय, नागौर द्वारा जिले के मीडिया प्रतिनिधियों के लिए विभिन्न पारंपरिक जल स्रोतों एवं जल संरक्षण स्थलों का फील्ड भ्रमण आयोजित किया गया। इस भ्रमण का उद्देश्य जल संरक्षण के महत्व, पारंपरिक जल स्रोतों की उपयोगिता तथा जिले में जल संवर्धन के सफल स्थानीय मॉडलों की जानकारी आमजन तक पहुंचाना था।
भ्रमण के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों ने जिले के विभिन्न तालाबों, सरोवरों और नर्सरी का अवलोकन कर जल संरक्षण की व्यवस्थाओं को नजदीक से देखा। साथ ही ग्रामीणों और अधिकारियों से संवाद कर जल स्रोतों की स्थिति, उपलब्धता तथा उनके संरक्षण एवं उपयोग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

*गोगेलाव के ऐतिहासिक गोगामेड़ी तालाब का किया अवलोकन*

फील्ड भ्रमण की शुरुआत गोगेलाव स्थित ऐतिहासिक गोगामेड़ी तालाब से हुई। लगभग 20 मीटर गहरे इस तालाब का विशाल जलग्रहण क्षेत्र आसपास के गांवों के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत माना जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि यह तालाब वर्षभर पेयजल की जरूरतों को पूरा करता है। इसकी विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार की मशीनरी अथवा पाइपलाइन के माध्यम से पानी नहीं भरा जाता। आज भी ग्रामीण महिलाएं पारंपरिक तरीके से मटकों के जरिए यहां से पानी भरकर ले जाती हैं, जो जल स्रोतों के प्रति स्थानीय समुदाय की संवेदनशीलता और संरक्षण भावना को दर्शाता है।

*नर्सरी में जाना पर्यावरण संरक्षण का महत्व*

इसके बाद मीडिया प्रतिनिधियों ने गोगेलाव स्थित नर्सरी का भ्रमण किया, जहां उन्हें पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी गई। नर्सरी में खेजड़ी, नीम, पीपल सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधों का अवलोकन कराया गया। अधिकारियों ने बताया कि जल संरक्षण और हरित आवरण एक-दूसरे के पूरक हैं तथा दोनों के समन्वित प्रयासों से पर्यावरण संतुलन बनाए रखा जा सकता है।

*रोल का कासोलाई सरोवर बना जल संरक्षण की मिसाल*

भ्रमण के अगले चरण में मीडिया प्रतिनिधियों ने रोल स्थित कासोलाई सरोवर का दौरा किया। ग्रामीणों ने बताया कि यह सरोवर आसपास के लगभग 15 गांवों और करीब 12 हजार की आबादी के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत है। सरोवर के किनारे स्थित धार्मिक स्थलों के कारण यह क्षेत्र सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। यहां मीडिया प्रतिनिधियों ने जल संरक्षण की पारंपरिक व्यवस्थाओं तथा सामुदायिक सहभागिता को करीब से देखा।

*नौसर तालाब की संरचना ने खींचा ध्यान*

इसके पश्चात डेह क्षेत्र के नौसर तालाब का निरीक्षण किया गया। ग्रामीणों के अनुसार यह तालाब आसपास के 13 गांवों की पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। तालाब की संरचना, जलग्रहण क्षेत्र और जल संचयन क्षमता ने भ्रमण दल का विशेष ध्यान आकर्षित किया। ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से यह तालाब क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी भूमिका निभा रहा है।

*कठौती सरोवर में देखा सामुदायिक सहभागिता का उदाहरण*

भ्रमण के अंतिम चरण में जायल क्षेत्र के कठौती सरोवर का अवलोकन किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि यह सरोवर आसपास के लगभग 20 गांवों के लिए वर्षभर जल उपलब्ध कराता है। यहां जल संरक्षण की परंपरागत व्यवस्थाओं और स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। मीडिया प्रतिनिधियों ने जल स्रोतों के संरक्षण में ग्रामीणों की भूमिका को सराहा।

*जनभागीदारी से ही संभव है जल संरक्षण*

फील्ड भ्रमण के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों ने जल संरक्षण से जुड़े स्थानीय प्रयासों, पारंपरिक जल स्रोतों की उपयोगिता तथा सामुदायिक सहभागिता के विभिन्न पहलुओं को समझा। अभियान के तहत यह संदेश दिया गया कि जल स्रोतों का संरक्षण और संवर्धन केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें जनभागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
यह फील्ड भ्रमण जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ. मनीष जैन के नेतृत्व में आयोजित किया गया। इस दौरान नागौर ब्लॉक के विकास अधिकारी अमित चौधरी, जायल के विकास अधिकारी महावीर प्रसाद, सरपंच मनफूल सिंह डिडेल, सूचना केंद्र के घनश्याम मुंडेल तथा सूचना सहायक राकेश भादू सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।