अलकेश पारीक
खेरुणा।स्मार्ट हलचल।ग्राम खेरुणा में आयोजित श्रीमद् पुरुषोत्तम भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास पं. सत्यनारायण महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य को भगवान पर अटूट विश्वास रखना चाहिए। यह भावना कि भगवान हर समय हमारे साथ हैं, जीवन को सही दिशा प्रदान करती है और विपरीत परिस्थितियों में भी संबल देती है।
महाराज ने भक्ति के विभिन्न चरणों का वर्णन करते हुए बताया कि श्रद्धा, विश्वास, गुरु मंत्र, अनर्थ निवृत्ति, निष्ठा, आसक्ति, रुचि, भाव और प्रेम के माध्यम से साधक अपनी आध्यात्मिक प्रगति को पहचान सकता है। उन्होंने कहा कि इन गुणों का विकास व्यक्ति को ईश्वर के अधिक निकट ले जाता है।
ऋतु वर्णन के प्रसंग में उन्होंने कहा कि जिस प्रकार ग्रीष्म ऋतु का ताप सहन करने के बाद वर्षा ऋतु का सुख प्राप्त होता है, उसी प्रकार जीवन में सफलता के लिए परिश्रम और तपस्या आवश्यक हैं। इसके बाद ही शांति, संतोष और सुख की अनुभूति होती है।
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की चीरहरण लीला, गोवर्धन लीला, कंस वध सहित विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। साथ ही द्वारिका नगरी की स्थापना और धर्म आधारित शासन व्यवस्था की महिमा का भी वर्णन किया गया। कथा के समापन पर भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मिणी के दिव्य विवाह प्रसंग का मनोहारी चित्रण किया गया, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कथा व्यास पं. सत्यनारायण महाराज ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक पौधे लगाने एवं उनकी देखभाल करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर धर्मेश व्यास, नवीन व्यास, उदयलाल व्यास, रामगोपाल शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
