रायला (लक्की शर्मा)। कस्बे के आनंद विश्राम कुंज में रविवार से श्रीमद् शिव महापुराण कथा महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। इस धार्मिक अनुष्ठान के तहत रविवार सुबह 8 बजे रायला चारभुजा मंदिर से एक विशाल एवं भव्य 51 कलश शोभायात्रा निकाली गई। पुरुषोत्तम पवित्र अधिक मास के पावन उपलक्ष्य में आयोजित इस कथा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया। शोभायात्रा में महिलाएँ व पुरुष पारंपरिक रंग-बिरंगे परिधानों में सजे-धजे नजर आए। महिलाएँ सिर पर मंगल कलश धारण कर बैंड-बाजे और ढोल-नगाड़ों की थाप पर जयकारे लगाते हुए चल रही थीं। इस दौरान पूरा माहौल शिवभक्ति के भजनों की धुन से गुंजायमान हो उठा, जिस पर महिला-पुरुष श्रद्धालु भावविभोर होकर नृत्य करते नजर आए। महिला सत्संग मंडल एवं समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से इस भव्य आयोजन की शुरुआत की गई है। कथावाचक पंडित दुर्गेश चतुर्वेदी (रामपुरिया, मध्य प्रदेश) द्वारा कथा स्थल आनंद विश्राम कुंज, रायला में 7 जून से 13 जून तक प्रतिदिन प्रातः काल 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक आयोजित होगी। कथा के प्रथम दिन माहात्म्य पर प्रकाश डालते हुए रामपुरिया (एमपी) से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित दुर्गेश चतुर्वेदी ने कहा कि जो जीव और शिव को एकाकार (एक) कर दे, वही ग्रंथ महाशिवपुराण है। इस पावन कथा का केवल श्रवण मात्र ही मनुष्य के समूल पापों के विनाश का सबसे सरल माध्यम है। पंडित ने भावपूर्ण शब्दों में कहा मनुष्य हमेशा जानबूझकर पाप नहीं करता, कई बार अनजाने में मन, कर्म और वाणी से भूल हो जाती है। कुसंगति, लालच, लोभ, काम या भोग के अधीन होकर भी इंसान गलतियाँ कर बैठता है। यदि इन पापों से शीघ्र मुक्ति और शांति चाहिए, तो सच्चे हृदय से भगवान शिव के समक्ष प्रायश्चित करें। शिव से बड़ा दानी, दयालु और कृपालु इस ब्रह्मांड में और कोई नहीं है। कथा के दौरान बिंदु और उसकी पत्नी चंचुला के पौराणिक प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि नारी के लिए सर्वश्रेष्ठ धर्म पति-सेवा है। जो नारियां पतिव्रत धर्म का पालन करती हैं, वे इस लोक और परलोक दोनों ही जगह वंदनीय हो जाती हैं। उन्होंने सभी को भगवान शिव की तरह उपकारी और परोपकारी बनकर जीवन बिताने तथा हमेशा सकारात्मक विचार, सद्भावना व मानव कल्याण के लिए प्रयासरत रहने का संदेश दिया। यह कथा आगामी 13 जून तक अनवरत जारी रहेगी, जिसमें क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु रोजाना अमृत वर्षा का आनंद लेंगे।