मेगा हाइवे के सफर में पेट का पानी नहीं हिलता, बल्कि पेट पकड़कर बैठना पड़ता है…

गड्ढों में सड़क तब्दील, हिचकोले मारते वाहन, प्रशासन गहरी निद्रा में

जितेन्द्र गौड़

लाखेरी – स्मार्ट हलचल।कोटा–दौसा मेगा हाईवे पर आजन्दा से पापड़ी रेलवे ओवरब्रिज तक करीब 20 किलोमीटर मार्ग गहरे गड्ढों से छलनी हो चुका है। मानसून पूर्व बरसात के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है और वाहन चालक रोजाना जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। सोमवार रात को भी घाट का बराना में रघुनाथ मन्दिर के समीप गड्डो को बचाने के चक्कर मे एक कार व बाइक में टक्कर हो गई हालांकि दोनों वाहनो की गति कम होने से ज्यादा गम्भीर चोटे नही आई।
ग्रामीण महावीर बैरागी का कहना है, कि बलदेवपुरा, घाट का बराणा, देईखेड़ा, झपायता, लबान और पापड़ी ओवरब्रिज सहित कई स्थानों पर सड़क की हालत बेहद खराब है। आजन्दा निवासी भेरू सिंह और कांग्रेस नेता रमेश गुर्जर ने बताया कि कई बार शिकायतों के बावजूद विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। देईखेड़ा के ग्रामीण हनुमान गुर्जर और अजय मीणा ने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि और अधिकारी इसी मार्ग से गुजरते हैं, फिर भी सड़क की अनदेखी की जा रही है। देईखेड़ा अस्पताल में कार्यरत रेहाना और लबान निवासी रामावतार मीणा ने बताया कि गड्ढों के कारण हर समय हादसे का डर बना रहता है।

*चार जनों की मौत के बाद भी प्रशासन की नहीं खुली नींद*

उल्लेखनीय है कि करीब एक वर्ष पूर्व घाट का बराना स्थित रघुनाथ मंदिर के पास गड्ढों के कारण एक यात्री बस हादसे का शिकार हो गई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी। इसके बावजूद सड़क की स्थायी मरम्मत नहीं होने से लोगों में रोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है। मेगा हाइवे पर इससे पूर्व भी कई घटनाएं घटित हो चुकी है। जिसमें कई लोगों की जान जा चुकी है। मेगा हाइवे पर सफर करना गांवों की सड़कों जैसा है, जहां पर हर कदम पर गड्ढे हो रहे हैं। इस मार्ग पर सफर करने वाले गड्ढों की वजह से परेशान हो गए, इस मार्ग पर ज्यादा दिक्कत बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों को हो रही है, जो गड्ढों के मारे सफर करने में परेशान हो जाते हैं, जिनकी और अधिक बीमार होने की आशंका रहती है। आखिर प्रशासन गड्ढों की ओर क्यों ध्यान नहीं दे रहा है।