कुमार अंकेश
बानसूर|स्मार्ट हलचल।क्षेत्र के ग्राम महनपुर में बुधवार को हरियाणवी सांग कला के प्रख्यात लोककवि और सांग सम्राट मास्टर नेकीराम की पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में क्षेत्र के साहित्यकारों, लोक कलाकारों और ग्रामीणों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर लोक संस्कृति में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया। मास्टर रामनिवास मेघवाल ने बताया कि जैतड़ावास निवासी मास्टर नेकीराम ने हरियाणवी सांग कला के विकास और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जन्म 6 अक्टूबर 1915 को प्रसिद्ध संगीताचार्य मास्टर मूलचंद औंर लाडो देवी के घर हुआ था। उन्होंने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए गुरु महंत गोपाल नाथ के आशीर्वाद से सांग कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। बानसूर क्षेत्र से उनका बेहद लगाव था। मास्टर गिर्राज योगी ने बताया कि मास्टर नेकीराम की गायन शैली अद्भुत थी।उनके सांग मंचन सात से आठ घंटे तक चलते थे, जिनका पूरा परिवार एक साथ बैठकर आनंद लेता था। उन्होंने अपने जीवनकाल में तीन दर्जन से अधिक हरियाणवी सांगों और हजारों लोक रचनाओं का सृजन कर लगभग 60 वर्षों तक उनका मंचन किया। उन्होंने अपने सांगों के माध्यम से मंदिर, कुएं, बावड़ी, धर्मशाला, गौशाला, स्कूल और तालाब जैसे जनहित कार्यों में सहयोग दिया। उन्होंने गरीब कन्याओं के विवाह और जरूरतमंदों की सहायता कर मानवता की मिसाल कायम की। स्वतंत्रता संग्राम और सैनिकों के उत्साहवर्धन में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।मास्टर नेकीराम का निधन 10 जून 1996 को हुआ था। उनके शिष्य और लोक कलाकार आज भी उनकी सांग परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। इस दौरान साहित्य प्रेमी मौजूद रहें।
