मंगरोप@मुकेश खटीक।प्रशासनिक उदासीनता का खामियाजा पिछले एक साल से एक बेजुबान मवेशी भुगत रहा है।मंगरोप कस्बे के मुख्य बस स्टैंड स्थित एक खुली मुंडेर वाले कुएं में करीब एक वर्ष पूर्व एक छोटा सुअर गिर गया था,जो आज भी उसी कुएं में फंसा हुआ है।उस समय उसकी उम्र लगभग एक माह थी,लेकिन प्रशासन और संबंधित विभागों की अनदेखी के चलते आज तक उसका रेस्क्यू नहीं हो सका है।स्थानीय होटल संचालक राकेश साहू ने बताया कि बस स्टैंड पर व्यवसाय करने वाले लोग पिछले एक साल से उस बेजुबान के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। रोजाना कुएं में खाने-पीने की सामग्री डाली जाती है तथा सरकारी ट्यूबवेल से पाइप के माध्यम से उसे पानी उपलब्ध कराया जाता है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्थानीय लोगों का सहयोग नहीं मिलता तो वह बेजुबान कब का दम तोड़ चुका होता।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
ग्रामीणों ने बताया कि फरवरी 2024 में भी कस्बे में इसी तरह की एक घटना सामने आई थी।आईसीआईसीआई बैंक के पास महात्मा गांधी स्कूल के सामने स्थित बिना मुंडेर वाले कुएं में एक स्वान (सुअर) करीब आठ माह तक फंसा रहा था। प्रशासनिक लापरवाही के कारण उसे लंबे समय तक कुएं में ही जीवन बिताना पड़ा।बाद में उदयपुर से आई एनिमल रेस्क्यू सेंटर की टीम ने अध्यक्ष चमन सिंह चौहान के नेतृत्व में करीब चार घंटे तक चले कठिन अभियान के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाला था।
एसडीएम के निर्देश भी तबादले के साथ हो गए गायब
उक्त रेस्क्यू अभियान के बाद तत्कालीन हमीरगढ़ एसडीएम ने क्षेत्र में खुले और बिना मुंडेर वाले कुओं पर जाली लगाने तथा सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। लेकिन अधिकारियों के तबादले के साथ ही ये निर्देश भी फाइलों में दबकर रह गए।नतीजा यह रहा कि आज भी क्षेत्र में कई खुले,सूखे और बिना मुंडेर वाले कुएं लोगों और पशुओं के लिए खतरा बने हुए हैं।
कई बेजुबान बन चुके हैं हादसों का शिकार
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में दर्जनों ऐसे कुएं हैं जिन पर न तो मुंडेर है और न ही सुरक्षा जाली।इन कुओं में गिरकर कई पशु अपनी जान गंवा चुके हैं,जबकि कई लंबे समय तक फंसे रहने को मजबूर हुए हैं।इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
ग्रामीणों ने उठाई कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र के सभी खुले और बिना मुंडेर वाले कुओं का सर्वे कर उन्हें तत्काल सुरक्षित कराया जाए।साथ ही बस स्टैंड स्थित कुएं में पिछले एक साल से फंसे बेजुबान मवेशी का शीघ्र रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित बाहर निकाला जाए,ताकि वह भी प्रशासनिक लापरवाही की सजा से मुक्त हो सके।ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते खुले कुओं पर सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में ऐसे हादसे और बढ़ सकते हैं तथा कई और बेजुबान इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकाएंगे।
