कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और बालश्रम मुक्ति के लिए ब्यावर पुलिस एक्टिव, एएसपी डॉ. अनुकृति ने दिए कड़े निर्देश
अनिल कुमार
ब्यावर।स्मार्ट हलचल।जिला पुलिस अधीक्षक रतनसिंह के निर्देशानुसार ब्यावर जिला पुलिस इन दिनों महिला सुरक्षा और बाल कल्याण को लेकर पूरी तरह एक्शन मोड में है। इसी क्रम में आज पुलिस अधीक्षक सभागार में दो बेहद महत्वपूर्ण जागरूकता और समीक्षा कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसकी कमान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. अनुकृति उज्जैनिया ने संभाली।
1. कार्यस्थल पर महिलाओं को सुरक्षित माहौल देना हमारी प्राथमिकता: एएसपी डॉ. अनुकृति उज्जैनिया
शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक सभागार में जिले की समस्त महिला अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (POSH Act) के तहत एक विशेष जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. अनुकृति उज्जैनिया ने कहा कि हर महिला को कार्यस्थल पर सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल पाने का कानूनी अधिकार है
कार्यशाला की मुख्य बातें:
उत्पीड़न की परिभाषा: कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार का अवांछित शारीरिक, मौखिक या मानसिक व्यवहार, आपत्तिजनक संदेश, वीडियो दिखाना या कार्य के बदले अनुचित मांग करना लैंगिक उत्पीड़न की श्रेणी में आता है।
अधिकारों की जानकारी: महिला कर्मचारियों को आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के गठन, गोपनीय जांच और शिकायत के बाद मिलने वाले कानूनी संरक्षण के बारे में विस्तार से समझाया गया।
एएसपी की सलाह: यदि कोई महिला ऐसे दौर से गुजरती है, तो वह डरे नहीं। साक्ष्यों (जैसे मैसेज, ई-मेल, रिकॉर्डिंग) को सुरक्षित रखें और तुरंत आंतरिक समिति या नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क करें।
2. ‘उमंग-VII’ अभियान: ढाबों, होटलों और कारखानों पर रहेगी पुलिस की पैनी नजर
इससे पूर्व, पुलिस मुख्यालय के आदेशानुसार 1 जून से 30 जून 2026 तक चलाए जा रहे राज्य स्तरीय विशेष अभियान “उमंग-VII” को लेकर भी एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बालश्रम, बंधुआ मजदूरी और बाल तस्करी (मानव दुर्व्यापार) का पूरी तरह उन्मूलन करना है।
बैठक के कड़े निर्देश:
सख्त कार्रवाई: 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से मजदूरी कराने और 14 से 18 वर्ष के किशोरों को खतरनाक उद्योगों में लगाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
संयुक्त चेकिंग: पुलिस, श्रम विभाग, बाल अधिकारिता विभाग और स्वयंसेवी संगठनों (NGOs) की संयुक्त टीमें जिले के होटलों, ढाबों और कारखानों पर औचक निरीक्षण करेंगी।
पुनर्वास: रेस्क्यू किए गए बच्चों को चिल्ड्रन होम और शेल्टर होम के माध्यम से पुनर्वासित किया जाएगा।
ब्यावर पुलिस की जनता से अपील: जागरूक बनें, सूचना दें
पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि यदि उन्हें जिले में कहीं भी बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी, बाल तस्करी या बाल विवाह की जानकारी मिलती है, तो वे तुरंत निम्नलिखित नंबरों पर सूचित करें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी:
