राजस्व अधिकारियों पर आदेशों की अवहेलना और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के आरोप, सीमांकन व अतिक्रमण हटाने की मांग
अलकेश पारीक
स्मार्ट हलचल।तहसील जहाजपुर के ग्राम कांस्या निवासी छोटू पुत्र देवा मीणा ने जिला कलेक्टर भीलवाड़ा को ज्ञापन सौंपकर अपनी कृषि भूमि से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद में निष्पक्ष जांच और न्याय दिलाने की मांग की है। प्रार्थी ने आरोप लगाया कि राजस्व अधिकारियों द्वारा उच्च अधिकारियों के आदेशों की पालना नहीं की गई तथा राजस्व अभिलेखों के विपरीत कार्रवाई कर उन्हें वर्षों से न्याय से वंचित रखा गया।
ज्ञापन के अनुसार, उनकी कृषि भूमि आराजी संख्या 978/6 के सीमांकन एवं पत्थरगड़ी को लेकर वर्ष 2019 में प्रकरण संख्या 178/2019 प्रस्तुत किया गया था। इस पर तत्कालीन उपखंड अधिकारी जहाजपुर ने 22 जुलाई 2019 को आदेश जारी कर भू-अभिलेख निरीक्षक खजूरी को कमिश्नर नियुक्त करते हुए 15 दिनों के भीतर पत्थरगड़ी कर पालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। आरोप है कि सात वर्ष बीत जाने के बावजूद आज तक आदेश की पालना नहीं हुई।
छोटू मीणा ने बताया कि वर्ष 2021 में भी उन्होंने जिला कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद कलेक्टर कार्यालय द्वारा तहसीलदार जहाजपुर को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई और मामला लंबित ही रहा।
प्रार्थी के अनुसार, 27 मई 2026 को तहसीलदार जहाजपुर ने राजस्व टीम गठित कर ग्राम कांस्या स्थित विवादित भूमि से अतिक्रमण हटाने के निर्देश जारी किए थे। आरोप है कि 3 जून 2026 को मौके पर वास्तविक अतिक्रमण हटाने के बजाय एक विशेष पक्ष को लाभ पहुंचाने की नीयत से खातेदारी भूमि को ही बिलानाम बताकर रास्ता निकाल दिया गया, जिससे उनके अधिकारों का हनन हुआ और विवाद और अधिक गहरा गया।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कुछ अधिकारियों ने राजस्व रिकॉर्ड एवं उच्च अधिकारियों के आदेशों के अनुरूप निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया, जिससे वास्तविक अतिक्रमणकारियों को संरक्षण मिला। प्रार्थी ने इसे प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग का गंभीर मामला बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
कलेक्टर से की गई प्रमुख मांगें:
वर्ष 2019 से अब तक की समस्त राजस्व कार्रवाई एवं अभिलेखों की निष्पक्ष जांच करवाई जाए।
3 जून 2026 की कार्रवाई की वीडियोग्राफी, रिपोर्ट एवं संबंधित रिकॉर्ड तलब किए जाएं।
यह जांच की जाए कि वास्तविक अतिक्रमण हटाने के बजाय रास्ता किस आधार पर निर्मित किया गया।
दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर विभागीय कार्रवाई की जाए।
राजस्व अभिलेखों के अनुसार पुनः सीमांकन, पत्थरगड़ी एवं अतिक्रमण हटाने की निष्पक्ष कार्रवाई करवाई जाए।
जांच पूरी होने तक विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए जाएं तथा प्रार्थी को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाए।
छोटू मीणा ने जिला प्रशासन से उम्मीद जताई है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर उन्हें न्याय दिलाया जाएगा तथा आमजन का प्रशासन पर विश्वास कायम रखा जाएगा।
