– श्रीकृष्णा राय ‘हृदयेश’ की 27वीं पुण्यतिथि दी श्रद्धांजलि
गाजीपुर ।स्मार्ट हलचल।नगर के नखास स्थित हृदयेश पथ गौतम आश्रम में शनिवार को ख्यातीलब्ध साहित्यकार पत्रकार, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व श्रीकृष्ण राय ‘हृदयेश’ की 27वीं पुण्य तिथि पर उनके तैल चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की । इस अवसर पर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा की गई। हृदयेश के कनिष्ठ पुत्र सेवानिवृत कर्नल ब्रह्मानंद राय ने कहा कि बाबूजी 16 वर्ष की अवस्था ने स्वतंत्रता संग्राम मे कूद पड़े थे। उनके मामा शेरपुर के थे नाम छेदी लाल था। उनसे ही प्रेरित होकर स्वतंत्रता संग्राम मे भाग लिये। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी श्रीकृष्ण राय हृदयेश ऐसी विभूतियों में एक थे जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने के बाद जीवनपर्यंत समाज एवं देश को समर्पित रहे। साहित्य के इस मौन साधक की 13 जून आज के दिन पुण्यतिथि है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी समाजसेवी पत्रकार और कवि सभी रूप में पूरी दक्षता से अपने व्यक्तित्व की किरणें बिखेरीं। योग साधना, अध्यात्म, राजनीति धर्म दर्शन सभी में उन्हें समान दक्षता प्राप्त थी। जीवन में सादगी का गुण पिता से विरासत में मिला था। वह आजीवन अपने पराए के द्वंद से दूर मैं और तू से परे रहे। इनका आवास नवांकुर साहित्यकारों व पीड़ित समुदाय के स्वागत के लिए लालायित रहता था। उनके चरणों में बैठकर आज के अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार साहित्य जगत में स्थान पा चुके हैं। वह व्यक्ति नहीं स्वयं में एक संस्था थे। गिरजा राय ने कहां महात्मा गांधी के न रहने पर उनकी स्मृति में उन्होंने 1949 में लोक सेवक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन किया। जो तीन दशकों तक पूर्वांचल की सर्वश्रेष्ठ साप्ताहिक पत्रिका रही। उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में क्रांतिकारी कार्य किया। नेशनल हेराल्ड, पायनियर, टाइम्स आफ इंडिया, स्टेटमेंट, अमृत बाजार पत्रिका, लीडर, जनवार्ता, दैनिक जागरण से निरंतर जुड़े रहे। 1932 मे 22 वर्ष की अवस्था मे पहला काव्य पुस्तक युवक प्रकाशित हुआ। बहुमुखी प्रतिभा के धनी हृदयेश ने मिथकीय काव्य की रचना की। भोजपुरी सतसई भोजपुरी भाषा की मानक कृति है।’ सत्यासत्य’ महाभारत पर आधारित है। अब उनकी सिर्फ स्मृति शेष है। इस अवसर पर प्राची, हिंमाशु, शिल्पी,कार्तिक, आयुषी, कौस्तुभ आदि उपस्थित रहे ।
