त्रिवेणी संगम में उमड़ा आस्था का महासैलाब: सोमवती अमावस्या व कालसर्प योग पर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

भीलवाड़ा | धार्मिक समाचार | त्रिवेणी संगम मेला

वैदिक आचार्यों के सान्निध्य में हुए कालसर्प दोष निवारण अनुष्ठान; मंत्रोच्चार से गुंजायमान हुई भगवा नगरी, पुलिस व मंदिर समिति की मुस्तैदी से व्यवस्थाएं रहीं चाक-चौबंद
 रमेश चंद्र डाड
(आकोला)

त्रिवेणी संगम (आकोला), 15 जून 2026।स्मार्ट हलचल।मेवाड़ की प्रसिद्ध भगवा नगरी त्रिवेणी संगम में सोमवती अमावस्या एवं कालसर्प योग के पावन संयोग पर हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। प्रातःकाल से ही पवित्र संगम तट पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों, स्नान एवं विशेष पूजन का क्रम चलता रहा। श्रद्धालुओं ने पवित्र संगम में स्नान कर भगवान शिव एवं भगवान विष्णु की आराधना करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।

प्रख्यात आचार्यों के सान्निध्य में गूंजे वैदिक मंत्र:

इस पावन अवसर पर प्रसिद्ध वैदिक आचार्यों— आचार्य ओमप्रकाश व्यास, आचार्य दुर्गाशंकर भट्ट, जयप्रकाश भट्ट, विजय शास्त्री (देवली), शिवप्रकाश भट्ट, आचार्य पंकज कुमार भट्ट, आचार्य गोविन्द त्रिवेणी, धनराज शास्त्री एवं वेदप्रकाश जी के सान्निध्य में विशेष पूजा-अर्चना, कालसर्प दोष निवारण एवं विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक जयघोषों से पूरा संगम क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा।

प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्थाएं रहीं पुख्ता:
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा। थानाधिकारी के नेतृत्व में पुलिस जाब्ता तैनात रहा तथा सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखी गई। संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए पेयजल एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई, जिससे दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

आयोजन को सफल बनाने में मंदिर समिति एवं उसके सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समिति के पदाधिकारियों एवं स्वयंसेवकों ने दर्शन व्यवस्था, जल सेवा, साफ-सफाई एवं श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन की जिम्मेदारी संभालते हुए पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित बनाया। दिनभर संगम क्षेत्र में मेले जैसा माहौल बना रहा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ प्राप्त किया।