पात्रता नियमों के विरोध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ कल भीलवाड़ा कलेक्ट्रेट पर देगा धरना, कलेक्टर को सौंपेंगे ज्ञापन

भीलवाड़ा | शिक्षक आंदोलन | कलेक्ट्रेट धरना

2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी (TET) की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त करने की मांग; जिलाध्यक्ष सुरेश चंद्र बड़वा की अध्यक्षता में जिले भर से जुटेंगे हजारों शिक्षक
विशेष शैक्षिक रिपोर्ट: स्मार्ट हलचल ब्यूरो (भीलवाड़ा)

भीलवाड़ा, 17 जून 2026।स्मार्ट हलचल।अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) जिला भीलवाड़ा के तत्वावधान में दिनांक 18 जून को प्रातः 11.30 बजे जिला कलेक्ट्रेट के सामने विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री एवं शिक्षा मंत्री भारत सरकार के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस कार्यक्रम में भीलवाड़ा जिले भर से बड़ी संख्या में शिक्षक भाग लेंगे।

पूर्व प्रभाव (Retrospective Effect) से नियम लागू करना अन्यायपूर्ण:

जिला मंत्री श्री ईश्वर सिंह चौधरी ने बताया कि वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की नियुक्तियां तत्कालीन नियमों के अनुरूप पूर्णतः वैध थीं। बाद में निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना न्यायोचित नहीं है। लाखों शिक्षकों एवं उनके परिवारों के भविष्य को अनिश्चितता में डालना शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता एवं शिक्षकों के मनोबल दोनों को प्रभावित करेगा। संसद एवं केंद्र सरकार आवश्यक विधायी हस्तक्षेप कर इस वर्ग को उचित संरक्षण प्रदान करे।

ये रहे मुख्य वक्ता और पदाधिकारी:
यह ज्ञापन कार्यक्रम जिलाध्यक्ष श्री सुरेश चंद्र बड़वा की अध्यक्षता में आयोजित होगा। कार्यक्रम में अखिल भारतीय प्रतिनिधि श्रीमती सुषमा विश्नोई एवं चित्तौड़ प्रांत संगठन मंत्री श्री कैलाश चंद्र सुथार का विशेष सानिध्य प्राप्त होगा। महासंघ का विश्वास है कि राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिक्षक वर्ग के साथ न्याय सुनिश्चित करने हेतु भारत सरकार संवेदनशीलता का परिचय देगी।

महासंघ की प्रमुख मांगें:
1. 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी (TET) की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए।
2. ऐसे शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति एवं अन्य सेवा लाभों को पूर्ण संरक्षण प्रदान किया जाए।
3. आवश्यकता होने पर संसद में उपयुक्त विधायी संशोधन अथवा विशेष प्रावधान लाकर इस वर्ग को स्थायी राहत प्रदान की जाए।
4. सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस एवं असुरक्षा की स्थिति का तत्काल निराकरण किया जाए।