दिवेर व छापली युद्ध स्मारक को मेवाड़ कॉम्प्लेक्स में शामिल करने की उठी मांग, ब्यावर में शौर्य के साथ मनाई महाराणा प्रताप जयंती

अनिल कुमार

ब्यावर।स्मार्ट हलचल।राजस्थान रावत राजपूत महासभा, ब्यावर के तत्वाधान में बुधवार को दिवेर विजय स्मारक पर महाराणा प्रताप की जयंती अत्यंत श्रद्धा, गौरव और राष्ट्रभक्ति के साथ मनाई गई। इस अवसर पर समाज के गणमान्य लोगों, युवाओं और महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप को नमन किया।

मगरा क्षेत्र के योद्धाओं का योगदान अतुलनीय: पूर्व विधायक सुदर्शनसिंह
समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए भीम के पूर्व विधायक सुदर्शनसिंह रावत ने महाराणा प्रताप के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप का त्याग और बलिदान आज के युवाओं के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने दिवेर के ऐतिहासिक युद्ध में मगरा क्षेत्र के योद्धाओं द्वारा दिए गए अद्वितीय और ऐतिहासिक योगदान को याद किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महासभा के प्रदेशाध्यक्ष पन्नासिंह जोडकिया ने की।

ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर लाने की मांग, प्रस्ताव पारित
महासभा के वरिष्ठ महामंत्री प्राचार्य मानसिंह चौहान ने बताया कि जयंती समारोह के दौरान क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। प्रस्ताव में मांग की गई कि:

दिवेर विजय स्मारक एवं छापली युद्ध स्मारक को तुरंत मेवाड़ कॉम्प्लेक्स में शामिल किया जाए।

दिवेर-छापली के मध्य स्थित ऐतिहासिक स्थलों जैसे—गौकुलगढ़, राताखेत, राणाखड़ा और ऊडेश्वर महादेव मंदिर का समुचित विकास कर इन्हें पर्यटन मानचित्र पर लाया जाए।

इन स्मारकों के नवनिर्माण व जीर्णोद्धार के लिए महासभा का एक शिष्टमंडल जल्द ही धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नत प्राधिकरण से मुलाकात करेगा।

लेखक चन्दनसिंह खौंखावत का हुआ साहित्यिक सम्मान
समारोह के दौरान इतिहास और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए “महाराणा प्रताप का दिवेर विजय संग्राम” पुस्तक के लेखक चन्दनसिंह खौंखावत का महासभा के पदाधिकारियों द्वारा भव्य स्वागत व सम्मान किया गया।

ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ महामंत्री मानसिंह चौहान ने किया। इस दौरान पूर्व प्रदेशाध्यक्ष भगवानसिंह चौहान, गिरधारीसिंह बरजाल, उपाध्यक्ष किशोरसिंह काछबली, राजियावास प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत, उदयसिंह छापली, प्रशासक सुरेशसिंह बरजाल, त्रिलोकसिंह स्वादड़ी, भंवरसिंह दिवेर, त्रिभुवन नारायणसिंह, हिरा लाल पालड़ी, अजीतसिंह चुंडावत, मदनसिंह काछबली, रूपसिंह जोधपुर, पुरूषोत्तम नारायणसिंह, रूपसिंह टोकरा, भैरूसिंह राणानाडी, गिरधारीसिंह सिरोदनिया, ख्यालसिंह ताल, रूपसागर सिंह, चूनसिंह खेड़ाजस्सा सहित समाज के कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

समारोह का समापन महाराणा प्रताप के जोशीले जयघोषों और राष्ट्रगान के साथ हुआ।