अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर नीट 2026 योद्धाओं का विजय संकल्प

प्रिय नीट 2026 परीक्षा के योद्धाओं और नीट के रणबांकुरों,

आप सभी को नीट 2026 की पुनर्परीक्षा में सफलता की अग्रिम शुभकामनाएँ।

स्मार्ट हलचल।जब पूरा विश्व 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रहा होगा, ठीक उसी पावन दिन आपकी नीट 2026 की पुनर्परीक्षा हो रही है। यह कोई साधारण संयोग नहीं, बल्कि जीवन की एक गहरी सीख है। मई में हुई नीट परीक्षा में पेपर लीक की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। लाखों विद्यार्थियों के महीनों का परिश्रम, अनगिनत रातों की नींद और डॉक्टर बनने के सपने एक पल में हिल गए थे। पर प्यारे बच्चों, याद रखिए—व्यवस्था की कोई चूक आपकी मेधा (इंटेलेक्चुअल कैपेबिलिटी ) की हार नहीं है, और यह आपकी ईमानदार मेहनत के मूल्य को रत्ती भर भी कम नहीं कर सकती।

योग का अर्थ है—जोड़ना। शरीर को मन से, मन को आत्मा से, और बिखरी हुई सारी ऊर्जा को एक बिंदु पर केंद्रित करना। ठीक इसी तरह, आगामी 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा में आपको अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ता को जोड़कर सफलता की नई इबारत लिखनी है। योग सिखाता है कि जब तक साँस चलती है, संघर्ष जारी रहना चाहिए; जब तक भीतर ऊर्जा है, लक्ष्य से पीछे नहीं हटना चाहिए। आप 22 लाख से अधिक अभ्यर्थी इस परीक्षा का हिस्सा हैं—यानी एक विशाल परिवार। इस पेपर लीक की घटना से निराश या हतोत्साहित होने की रत्ती भर भी आवश्यकता नहीं है; इसे जीवन की एक कठिन, पर मूल्यवान परीक्षा समझिए। जो सच्ची मेहनत करते हैं, उनके लिए हर बाधा नई ऊँचाई पर चढ़ने की सीढ़ी बन जाती है। इस संकट ने आपको कमज़ोर नहीं, बल्कि और मज़बूत बनाया है। अब आपके पास कुछ अतिरिक्त समय है—पहले से पढ़े हुए को और गहराई से दोहराने का, कमज़ोर विषयों को मज़बूत करने का और कुछ और मॉक टेस्ट देने का।

अब योग की इस शक्ति को अपने दैनिक जीवन में उतारिए। हर सुबह 15-20 मिनट सूर्य नमस्कार कीजिए; इससे शरीर में नई ऊर्जा आएगी और मन शांत रहेगा। अपने दिन की शुरुआत गहरी साँस, अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम के अभ्यास से करें। परीक्षा-हॉल में जब भी घबराहट या तनाव (एंग्जायटी ) महसूस हो, तो कुछ सेकंड के लिए रुकिए, गहरी साँस लीजिए और मन ही मन कहिए, *”मैंने परिश्रम किया है, मैं शांत हूँ, मैं पूरी तरह सक्षम हूँ।”* यह छोटा सा अभ्यास परीक्षा के दौरान आपकी एकाग्रता को कई गुना बढ़ा देगा।

नेगेटिव मार्किंग का डर कभी-कभी आपको घेर सकता है, पर योग से उपजी सजगता से आप उस पर भी जीत पा सकते हैं। केवल उन्हीं प्रश्नों का उत्तर दीजिए जिनमें आपको पूरा विश्वास हो। अंधाधुंध अनुमान लगाकर अंक खोने से बेहतर है कि संदेहास्पद प्रश्नों को छोड़ दिया जाए; इससे आपका स्कोर भी सुरक्षित रहेगा और मन का संतुलन भी। दिन में केवल 5 मिनट आँखें बंद करके अपनी सफलता की ‘विज़ुअलाइज़ेशन’ (कल्पना) कीजिए—स्वयं को सफ़ेद एप्रन पहने, गले में स्टेथॉस्कोप डाले, मरीज़ों की सेवा करते और अपने माता-पिता के चेहरों को गर्व से भरते हुए देखिए। यह सकारात्मक कल्पना आपकी आँखों में चमक और कदमों में दृढ़ता भर देगी।

नीट परीक्षा के इन 22 लाख अभ्यर्थियों में से हर कोई अलग-अलग परिस्थितियों से गुज़र रहा है। कोई गाँव से है, कोई शहर से; कोई आर्थिक तंगी झेल रहा है, तो कोई स्वास्थ्य की चुनौती। पर आप सबका लक्ष्य एक ही है—देश का भावी कुशल चिकित्सक बनना। पेपर लीक के संकट ने सबको एक समान चुनौती दी थी, और अब व्यवस्था ने सबको एक समान अवसर भी दिया है। इस अवसर को व्यर्थ मत जाने दीजिए। अपनी तैयारी को दोहराइए, पर अब और समझदारी के साथ। रात-रात भर जागकर शरीर को प्रताड़ित मत कीजिए, बल्कि एक संतुलित दिनचर्या अपनाइए। एक थका हुआ मस्तिष्क परीक्षा में वही भूल जाता है जिसे एक शांत मस्तिष्क सहजता से याद रख लेता है। योग आपको यही संतुलन सिखाता है।

उस पल की कल्पना कीजिए जब आप परीक्षा-हॉल से बाहर निकलेंगे और आपका मन पूरी तरह शांत होगा, क्योंकि आपने अपनी रणनीति से तनाव को जीत लिया होगा। उस क्षण को याद रखिए जब नीट का परिणाम आएगा और आपका नाम सफल अभ्यर्थियों की सूची में चमकेगा। पूरा परिवार खुशी से झूम उठेगा और आप स्वयं से गर्व से कह सकेंगे, *”मैंने हार नहीं मानी, मैं लड़ता रहा।”* और याद रखिए, यदि इस बार रैंक उम्मीद के मुताबिक न भी आए, तो भी जीवन थमता नहीं है। जैसा कि कवि हरिवंश राय बच्चन जी की प्रसिद्ध कविता कहती है—’कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती’, आप पुनः दुगनी शक्ति से प्रयास कर सकते हैं।

हम देश के समस्त माता-पिता और शिक्षकों से भी विनम्र निवेदन करते हैं कि इन अंतिम दिनों में बच्चों से केवल अंक, कट-ऑफ और रैंक की भाषा में बात न करें। उनसे मित्रवत पूछिए—”खाना खाया? नींद ठीक से आई? मन कैसा है?” उन्हें यह अटूट विश्वास दिलाइए कि वे परीक्षा के परिणाम से पहले भी आपके लिए उतने ही प्रिय थे और बाद में भी रहेंगे। कोई भी परीक्षा किसी बच्चे के अनमोल जीवन से बड़ी नहीं हो सकती। यदि किसी भी विद्यार्थी को अत्यधिक भय, अवसाद या निराशा घेरे, तो अपने परिवार, शिक्षक या मित्रों से बात करने में संकोच न करें। मदद माँगना कमज़ोरी नहीं, बल्कि एक साहसी कदम है।

प्रिय अभ्यर्थियों, यह परीक्षा केवल किताबी ज्ञान की नहीं, बल्कि आपके धैर्य, लगन और चरित्र की भी परीक्षा है। जो इस भट्टी में तपकर खरे उतरेंगे, वे जीवन की हर परीक्षा को आसानी से पार कर लेंगे। पेपर लीक के मानसिक तनाव और नकारात्मकता को अब पूरी तरह पीछे छोड़ दीजिए। अब आपका पूरा ध्यान केवल एक ही बिंदु पर होना चाहिए—नीट 2026 में आपकी शानदार सफलता।

हर सुबह जागकर खुद से कहिए, *”मैं हार नहीं मानूँगा, मैं सर्वश्रेष्ठ प्रयास करूँगा।”* 21 जून को जब सूर्य अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की स्वर्णिम ऊर्जा लेकर उगे, तो अपने भीतर के ज्ञान और संकल्प के सूर्य को भी जगाइए। शरीर स्वस्थ रखिए, मन शांत रखिए, लक्ष्य पर अडिग रहिए। आपका धैर्य और आपकी ईमानदारी से की गई मेहनत अवश्य रंग लाएगी। भविष्य में जब आप एक योग्य चिकित्सक बनकर देश के अनगिनत मरीज़ों की सेवा करेंगे और किसी गंभीर मरीज़ की जान बचाएँगे, तब आप महसूस करेंगे कि आज का यह सारा संघर्ष वाकई सार्थक था।

संकल्पित होकर उठो, जागो और विजय प्राप्त करो! हार मत मानो, क्योंकि तुम्हारा हौसला और तुम्हारी मेहनत किसी भी बाधा से बहुत बड़ी है।

पुनश्च, आप सभी को नीट परीक्षा में सफलता की अग्रिम शुभकामनाएँ!

*डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय* (एम. एस. नेत्र रोग विज्ञान, पी. जी. आई. चंडीगढ़), लेखक, प्रेरक वक्ता, नेत्र सर्जन, सुवि नेत्र चिकित्सालय, कोटा।

*डॉ. विदुषी शर्मा* (एम.बी.बी.एस., एम.डी., नेत्र रोग, एम्स, नई दिल्ली, एफ. आर. सी. एस., यू.के.), लेखिका, एवं नेत्र सर्जन, सुवि नेत्र चिकित्सालय, कोटा।