चरागाह में रातभर चला मिट्टी का खेल! ग्रामीणों ने घेरा डंपर-जेसीबी, हंगामे के बीच वाहन छुड़ाकर ले जाने का आरोप

मलगानी में अवैध मिट्टी दोहन को लेकर बवाल, प्रशासन की कार्यशैली पर भी उठे सवाल

मांडल, सुरेश चंद्र मेघवंशी । मलगानी गांव की चरागाह भूमि में रविवार देर रात कथित अवैध मिट्टी दोहन को लेकर जमकर हंगामा हो गया। ग्रामीणों का आरोप है कि रात के अंधेरे में जेसीबी मशीन और डंपरों की मदद से सरकारी चरागाह भूमि से मिट्टी निकाली जा रही थी। सूचना मिलने पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और खनन में लगे वाहनों को घेर लिया। इसके बाद मौके पर तनावपूर्ण माहौल बन गया। ग्रामीणों के अनुसार, चरागाह भूमि पर काफी समय से मिट्टी दोहन का खेल चल रहा है। रविवार देर रात भी जब जेसीबी मशीन से मिट्टी खोदी जा रही थी और डंपरों में भरकर ले जाई जा रही थी, तब ग्रामीणों ने एकजुट होकर विरोध किया। ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने डंपर संख्या RJ 09 GC 4001 सहित अन्य वाहनों को मौके पर रोक लिया था।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विरोध के दौरान खनन कार्य में शामिल लोगों ने दबंगई दिखाई और हंगामे के बीच वाहन छुड़ाकर ले गए। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास भी किया गया। घटना के बाद गांव में देर रात तक चर्चा और आक्रोश का माहौल बना रहा।

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप

ग्रामीण ओम प्रकाश, बालूराम, राहुल, रतनलाल जाट, हनुमान जाट, बालूलाल जाट, सूरजमल और जगदीश सहित अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि चरागाह भूमि से मिट्टी दोहन की शिकायत कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को दी जा चुकी है। उनका कहना है कि सूचना देने के बावजूद मौके पर समय पर कार्रवाई नहीं होने से अवैध गतिविधियों पर रोक नहीं लग पा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के कुछ समय बाद तक गतिविधियां बंद रहती हैं, लेकिन बाद में फिर से मिट्टी दोहन शुरू हो जाता है। इसे लेकर ग्रामीणों ने प्रशासनिक कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं।

भट्ठे तक पहुंच रही मिट्टी?

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चरागाह भूमि से निकाली जा रही मिट्टी का उपयोग स्थानीय ईंट भट्ठे पर किया जा रहा है। उनका दावा है कि भट्ठे के पास मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन मौके पर जांच कर मिट्टी के स्रोत की पुष्टि करे और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

चरागाह भूमि पर बढ़ता संकट

ग्रामीणों का कहना है कि चरागाह भूमि गांव की अमूल्य संपत्ति है, जहां पशुओं के लिए चारा उपलब्ध होता है। लगातार मिट्टी निकाले जाने से भूमि पर गहरे गड्ढे बन रहे हैं और इसका सीधा असर पशुपालकों पर पड़ सकता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों की मांग

अवैध मिट्टी दोहन की निष्पक्ष जांच हो।

खनन में प्रयुक्त जेसीबी और डंपरों को जब्त किया जाए।
सरकारी चरागाह भूमि को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो। मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो।
(समाचार ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों और शिकायत के आधार पर तैयार किया गया है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)