अस्पताल बना बीमारियों का अड्डा? मांडल उप जिला चिकित्सालय की बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल

भीलवाड़ा मांडल। एक ओर केंद्र सरकार स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर मांडल स्थित उप जिला चिकित्सालय की हालत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। जहां मरीज स्वस्थ होने की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, वहीं अस्पताल परिसर की गंदगी देखकर लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
अस्पताल के बाहर लगी शुद्ध मीठे पानी की प्याऊ गंदगी से अटी पड़ी है। प्याऊ के आसपास जमा कीचड़ और गंदा पानी मच्छरों के पनपने का बड़ा कारण बन रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
इतना ही नहीं, अस्पताल परिसर में जगह-जगह उगी कंटीली झाड़ियां, फैला कचरा और घूमते आवारा पशु व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल में इलाज के साथ-साथ गंदगी और बदबू का भी सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का कहना है कि जब स्वास्थ्य सेवाओं के सबसे महत्वपूर्ण केंद्र की यह स्थिति है तो आम स्थानों की हालत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या अस्पताल प्रशासन किसी बड़े हादसे या महामारी का इंतजार कर रहा है? आखिर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाली इन व्यवस्थाओं पर कब तक पर्दा डाला जाएगा?
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल सफाई अभियान चलाने, अस्पताल परिसर से झाड़ियों को हटाने तथा प्याऊ के आसपास फैली गंदगी को साफ कराने की मांग की है, ताकि मरीजों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सके।