पीपलूंद बाईपास निर्माण पर उठे सवाल, जांच के लिए 4 सदस्यीय समिति गठित
जहाजपुर, स्मार्ट हलचल। पीपलूंद बाईपास निर्माण कार्य को लेकर सामने आई गंभीर शिकायतों और जन-आक्रोश के बाद उपखंड प्रशासन ने मामले की आधिकारिक जांच शुरू कर दी है। उपखंड अधिकारी एवं उपखंड मजिस्ट्रेट जहाजपुर ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्चस्तरीय चार सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन करते हुए सात दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
मामले की चौतरफा गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार जहाजपुर की अध्यक्षता में गठित इस विशेष समिति में विकास अधिकारी (BDO) जहाजपुर, सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के सहायक अभियंता (AEN) तथा वन विभाग के रेंजर (Ranger) को सदस्य बनाया गया है। यह समिति मौके का तकनीकी व भौतिक निरीक्षण कर सभी तथ्यों एवं दस्तावेजों के आधार पर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
* चारागाह का दोहन: सरकारी चारागाह भूमि से बिना अनुमति बड़े पैमाने पर मिट्टी का अवैध दोहन करना।
* पर्यावरण को क्षति: खुदाई के दौरान चारागाह क्षेत्र के पुराने और मूल्यवान पेड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचाना।
* अरावली क्षेत्र में अवैध माइनिंग: प्रतिबंधित पहाड़ी क्षेत्र से बिना रॉयल्टी व अनुमति के मिट्टी, पत्थर व ग्रेवल निकालना।
* बजट की हेराफेरी: सड़क निर्माण के लिए सामग्री खरीद का भारी-भरकम बजट स्वीकृत होने के बावजूद मुफ्त की सरकारी भूमि को उजाड़ना।
* 50 बीघा भूमि प्रभावित: ठेकेदार की मनमानी से लगभग 50 बीघा से अधिक चारागाह भूमि का मूल स्वरूप नष्ट होने का दावा।
ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासनिक जांच पर टिकीं:
ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण के लिए टेंडर में सामग्री खरीद का पर्याप्त बजट स्वीकृत होने के बावजूद सरकारी संपदा और अरावली की पहाड़ियों को नुकसान पहुँचाया गया है, जो कि गंभीर वित्तीय व पर्यावरणीय अनियमितता की ओर इशारा करता है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि इस निष्पक्ष जांच से पूरे घोटाले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें पूरी तरह से प्रशासनिक जांच और उसकी आगामी रिपोर्ट पर टिक गई हैं।
