चारागाह की छाती चीरकर बन रहा बाईपास, ज्ञापन के 5 दिन बाद भी प्रशासन मौन
जहाजपुर, स्मार्ट हलचल [अलकेश पारीक]। ग्राम पीपलूंद में निर्माणाधीन बाईपास सड़क परियोजना को लेकर उपजा विवाद अब प्रशासन की लापरवाही के चलते गहराता जा रहा है। चारागाह भूमि को छलनी कर किए जा रहे अवैध दोहन के खिलाफ ग्रामीणों द्वारा उपखंड अधिकारी (SDM) को ज्ञापन सौंपे जाने के 5 दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

चारागाह का स्वरूप बदला, नियमों की अनदेखी
ग्रामीणों का आरोप है कि करीब तीन किलोमीटर लंबे बाईपास के लिए सार्वजनिक चारागाह भूमि को नियमों के विपरीत जाकर खोदा गया है। गहरे कटाव और उखड़ी हुई जमीन इस बात की गवाही दे रही है कि वर्षों से मूक पशुओं के उपयोग में आने वाली इस भूमि का मूल स्वरूप बदल गया है। बिना तकनीकी अनुमति के चारागाह और पहाड़ी क्षेत्र से मिट्टी और पत्थर खोदकर निर्माण में खपाए जा रहे हैं, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है।
पर्यावरण को अपूरणीय क्षति
निर्माण स्थल पर कई पुराने पेड़ों की जड़ें उजागर हो गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तेज हवा या बारिश में ये पेड़ गिर सकते हैं। एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण पर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर जहाजपुर में विकास के नाम पर हरे-भरे पेड़ों की बलि दी जा रही है।
कागजात सार्वजनिक करने की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण एजेंसी को चारागाह भूमि से मिट्टी और पत्थर दोहन की अनुमति देने संबंधी दस्तावेज, रॉयल्टी रसीदें और पीडब्ल्यूडी स्वीकृतियां सार्वजनिक की जाएं। पांच दिन बाद भी जांच कमेटी मौके पर नहीं पहुंची। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो क्षेत्र में उग्र आंदोलन होगा।
