15 वर्ष की उम्र, लेकिन प्रवचन में वर्षों की साधना का आभास; राम और कृष्ण जन्म प्रसंग पर भक्तिरस में डूबा कथा पंडाल

अलकेश पारीक

स्मार्ट हलचल।जिस उम्र में अधिकांश बच्चे स्कूल, खेल और मोबाइल की दुनिया में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में 15 वर्षीय बालव्यास राधे कृष्ण महाराज (कोटड़ी) अपनी ओजस्वी वाणी, शास्त्रों के गहन अध्ययन और प्रभावशाली प्रवचन शैली से श्रद्धालुओं को धर्म और भक्ति का संदेश दे रहे हैं। शिवाजी कॉलोनी, खजूरी में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिवस उनके मुखारविंद से भगवान श्रीराम जन्म और श्रीकृष्ण जन्म के प्रसंगों का ऐसा भावपूर्ण वर्णन हुआ कि पूरा कथा पंडाल भक्तिरस में सराबोर हो गया।

कथा के दौरान बालव्यास ने कहा कि भगवान के अवतार केवल चमत्कार दिखाने के लिए नहीं, बल्कि मानव समाज को धर्म, सत्य, मर्यादा और प्रेम का मार्ग दिखाने के लिए होते हैं। भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, आदर्श और कर्तव्य पालन की प्रेरणा देता है, जबकि भगवान श्रीकृष्ण का अवतार अन्याय और अधर्म के अंत तथा धर्म की पुनर्स्थापना का प्रतीक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में संस्कार, सेवा और भक्ति को अपनाने का आह्वान किया।

श्रीराम जन्म प्रसंग के वर्णन के समय पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा। वहीं जैसे ही श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग आया, ढोल-नगाड़ों और भजनों की मधुर धुन पर श्रद्धालु झूम उठे। “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष के बीच भगवान का जन्मोत्सव बड़े उत्साह से मनाया गया। महिलाओं ने मंगलगीत गाए, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा की और पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण छा गया।

कथा में सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र रहे बालव्यास राधे कृष्ण महाराज। उनकी स्पष्ट वाणी, सहज भाषा, शास्त्रों के प्रमाणों के साथ प्रसंगों की व्याख्या और जीवन से जुड़े उदाहरणों ने श्रद्धालुओं को अंत तक कथा से बांधे रखा। कम उम्र में इतना आत्मविश्वास, आध्यात्मिक अध्ययन और प्रभावशाली वक्तृत्व देखकर श्रद्धालु उनकी सराहना करते नजर आए। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि इतनी छोटी उम्र में इस प्रकार का ज्ञान और प्रस्तुति दुर्लभ है।

कथा के दौरान भजनों और संकीर्तन ने माहौल को और अधिक भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु पूरे समय भावविभोर होकर कथा का रसपान करते रहे। दूर-दराज के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंच रहे हैं।

आयोजक पंडित रामगोपाल भट्ट ने बताया कि सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 30 जून तक प्रतिदिन जारी रहेगा