_ग्रामीण बोले- मजदूरों से कराया जाता काम, मिलती रोजगार की गारंटी; एपीओ ने कहा- बाद में मनरेगा से होगा समतलीकरण_
खखरेरू /स्मार्ट हलचल।फतेहपुर धाता विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत रतनपुर, मजरा बरैयपुर स्थित बीरन तालाब का खनन कार्य मिशन-300 के तहत जेसीबी मशीन से शुरू होने पर मनरेगा मजदूरों और ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों का कहना है कि यदि तालाब की खुदाई मनरेगा के तहत पंजीकृत मजदूरों से कराई जाती तो उन्हें रोजगार मिलता, लेकिन मशीनों से कार्य कराए जाने से मजदूरों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।
जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स द्वारा बरसात से पहले जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिले में मिशन-300 अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में तालाबों के निर्माण एवं पुनर्जीवन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है ताकि वर्षा जल का अधिकतम संचयन किया जा सके। इसी क्रम में रतनपुर मजरा बरैयपुर स्थित बीरन तालाब का खनन कार्य प्रारंभ किया गया।
हालांकि, तालाब की खुदाई जेसीबी मशीन से कराए जाने पर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना है। ऐसे में मशीनों से कार्य कराए जाने से मजदूरों को काम मिलने की संभावना कम हो गई है।
ग्रामीण यासीन, रफीक, अकबर, रहूप, याकूब, रियाज, रामनरेश, गुड्डू, पुरुषोत्तम, विनीत और विपिन ने बताया कि प्रशासन को तालाबों की खुदाई मनरेगा मजदूरों से करानी चाहिए थी। इससे एक ओर तालाब का निर्माण होता, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों को रोजगार भी मिलता।
उधर, इस संबंध में पूछे जाने पर धाता के एपीओ ने बताया कि बीरन तालाब का निर्माण मिशन-300 के तहत राज्य वित्त एवं अन्य वित्तीय मदों के संयुक्त अभियान के अंतर्गत कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक खुदाई का कार्य मशीनों से कराया जा रहा है, जबकि बाद में तालाब के समतलीकरण एवं फिनिशिंग का कार्य मनरेगा मजदूरों से कराया जाएगा।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन मनरेगा मजदूरों को कितनी प्राथमिकता देता है और तालाब निर्माण में उन्हें वास्तविक रूप से रोजगार उपलब्ध हो पाता है या नहीं।
