रणवीर सिंह चौहान
स्मार्ट हलचल/ भवानी मंडी.सिक्खों के छठे गुरु, मीरी-पीरी के मालिक, साहिब श्री गुरु हरगोबिन्द साहिब जी महाराज के पावन प्रकाश पर्व को भवानी मंडी में बड़ी श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। गुरुद्वारा साहिब में आयोजित विशेष धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में संगत ने शिरकत की और गुरु साहिब के चरणों में नत्मस्तक होकर सेवा का अवसर प्राप्त किया।
गुरु हरगोबिन्द साहिब जी का जीवन साहस, न्याय और धर्म रक्षा का प्रतीक है। मात्र 11 वर्ष की आयु में गुरगद्दी संभालने के बाद उन्होंने सिक्ख पंथ को आध्यात्मिक (पीरी) के साथ-साथ शौर्य और सामरिक शक्ति (मीरी) प्रदान की। उन्होंने सिक्खों के सर्वोच्च स्थान अकाल तख्त साहिब की स्थापना की, दो तलवारें (मीरी-पीरी) धारण कीं और सिक्खों को “संत-सिपाही” बनाने की परंपरा स्थापित की। उनके नेतृत्व में सिक्ख पंथ ने पहली बार मुगल अत्याचार के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध किया, जिसकी प्रेरणा आज भी लाखों अनुयायियों को सत्य और धर्म की रक्षा के लिए प्रेरित करती है।
प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में दिनांक 18 जून से 29 जून तक श्री सुखमनी साहिब जी का लड़ीवार पाठ अनवरत रूप से चलाया गया। आज 30 जून को सवेरे 10.30 बजे निशान साहिब के चोले की सेवा और श्री सप्ताह पाठ साहिब की समाप्ति गुरु सिख परिवार की तरफ से हुई। इस अवसर पर विद्यार्थियों एवं युवाओं को गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष श्री प्रीतपाल सिंह जी तथा पूर्व अध्यक्ष सरदार दर्शन सिंह द्वारा सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गुरुद्वारा साहिब के सचिव अमनदीप सिंह जी ने कहा कि गुरु हरगोबिन्द साहिब जी ने न केवल सिक्खों को आध्यात्मिक मार्ग दिखाया, बल्कि अन्याय के सामने सिर झुकाने से इंकार कर मानवता, सत्य और धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने की प्रेरणा भी दी।
इस अवसर पर गुरुद्वारा साहिब में भव्य दीवान सजाया गया। हजूरी रागी भाई बलबीर सिंह जी एवं भाई हरकीरत सिंह जी के जत्थे द्वारा गुरबाणी के शब्द-कीर्तन, नाम-बाणी एवं कथा-कीर्तन प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम का समापन “सर्वत के भले” की अरदास के साथ हुआ। इसके पश्चात् मिस्सी रोटी और प्याज के साथ विशेष अटूट लंगर का प्रसाद संगत को वितरित किया गया।
भवानी मंडी एवं आसपास के क्षेत्रों की सिक्ख, सिंधी, पंजाबी तथा गुरु नानक नाम लेवा संगत ने पूरे कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और विभिन्न सेवा कार्यों में अपना योगदान दिया।
