पुरुषों में डिप्रेशन के लक्षण,महिलाओं में डिप्रेशन के क्या लक्षण हैं?

डिप्रेशन की समस्या होने पर लोग मानते हैं कि उन्हें अकेलापन, रोना या मन उदास रहेगा, लेकिन डिप्रेशन इससे कई ज्यादा गंभीर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, डिप्रेशन एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें व्यक्ति का मन लंबे समय तक बहुत उदास रहता है या फिर किसी जिन कामों में उसकी रूचि थी, उसमें भी दिलचस्पी खत्म हो जाती है। इसमें 4.6% पुरुष और 6.9% महिलाएं शामिल हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या महिलाओं और पुरुषों में लक्षण समान होते हैं और महिलाओं में डिप्रेशन बढ़ने का कारण ज्यादा क्यों है। खासकर पुरुषों और महिलाओं में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं।

महिलाओं में डिप्रेशन के क्या लक्षण हैं?

WHO के अनुसार, पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में डिप्रेशन होने की संभावना 1.5 गुना ज्यादा होती है।“आमतौर पर महिलाओं में डिप्रेशन का कारण हार्मोनल बदलाव भी हो सकता है। इसमें पीरियड्स से पहले होने वाले बदलाव, प्रेग्नेंसी, पोस्टपार्टम डिप्रेशन और मेनोपॉज शामिल है। इसके अलावा, महिलाएं अपने इमोशन्स को खुलकर बता देती हैं, इसलिए कई बार उनके लक्षण जल्दी समझ आ जाते हैं। महिलाओं को इन लक्षणों का ध्यान रखना चाहिए।”

  1. लगातार उदासी या खालीपन महसूस होना
  2. बिना वजह रोने का मन करना
  3. हर समय चिंता या घबराहट रहना
  4. खुद को दोष देना या अपराधबोध महसूस करना
  5. पहले पसंद आने वाले कामों में रुचि खत्म होना
  6. हर समय थकान महसूस होना
  7. लोगों से मिलना-जुलना कम कर देना

    पुरुषों में डिप्रेशन के लक्षण

    “पुरुषों में डिप्रेशन कई बार अलग तरीके से दिखता है। कई पुरुषों को उदासी के बजाय व्यवहार में बदलाव दिखता है। इसलिए पुरुषों को अपने बिहेवियर पर ध्यान देने की जरूरत है।”

    1. छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना
    2. हर समय चिड़चिड़ापन रहना
    3. हिंसक होना
    4. खुद को जरूरत से ज्यादा काम में बिजी रखना
    5. बहुत ज्यादा स्मोक, शराब या अन्य नशे का सहारा लेना
    6. परिवार और दोस्तों से दूरी बनाना
    7. अपने इमोशन्स को दूसरों के साथ शेयर न करना

    महिलाओं और पुरुषों में डिप्रेशन में क्या फर्क है?

    कई पुरुषों अपने उदासी को गुस्से में दिखाते हैं और उनके व्यवहार में बदलाव आने लगता है। यही कारण है कि परिवार के लोग भी कई बार समझ नहीं पाते कि वह डिप्रेशन से गुजर रहे हैं। इसके अलावा, पुरुषों को बचपन से मजबूत और इमोशन्स अपने तक रखने की सीख दी जाती है। इसलिए पुरुषों का डिप्रेशन जल्दी पता नहीं चलता और कई बार इसका नतीजा आत्महत्या तक पहुंच जाता है। वहीं महिलाएं अपने इमोशन्स को बात देती हैं, इसलिए उनके डिप्रेशन के लक्षण जल्दी पहचान में आ जाते हैं और वे मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेने में भी नहीं हिचकती।”