मुख्य आकर्षण रहा चादर का जुलूस, बैंड-बाजे और सूफियाना कलामों के बीच उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब; हिंदू समाज ने किया भव्य स्वागत
अमरगढ़|स्मार्ट हलचल।कस्बे में हजरत सैयद फैज अली शाह रहमतुल्लाह अलैह का दो दिवसीय 58वां सालाना उर्स अकीदत और एहतराम के साथ संपन्न हुआ। उर्स के मुख्य दिन रविवार को अकीदतमंदों ने मजार शरीफ पर सलमा-सितारों से जड़ी मखमली चादर व फूल पेश कर देश और क्षेत्र में खुशहाली व अमन-चैन की दुआ मांगी। इस दौरान दरगाह परिसर सैयद फैज अली सरकार के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
*ढोल-नगाड़ों के साथ निकला चादर का जुलूस*
उर्स कमेटी के सदर सत्तार बिसायती ने बताया कि दोपहर में चादर शरीफ का शाही जुलूस मुख्य बाजार से रवाना हुआ, जो विभिन्न मार्गों से होता हुआ दरगाह शरीफ पहुंचा। जुलूस निम्बाहेड़ा के मशहूर ‘जय हिन्द’ बैंड-बाजे की मधुर ध्वनि और ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ निकाला गया। जुलूस के दौरान बैंड गायक कव्वाल अनवर अकील भाई ने कौमी एकता पर आधारित सूफियाना कलाम पेश कर माहौल को रूहानी बना दिया। जुलूस जिस भी रास्ते से गुजरा, उसे देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम
उर्स के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। जुलूस के दौरान शक्करगढ़ थाना प्रभारी पूरण मल मीणा, चौकी प्रभारी एएसआई ताराचंद, और एएसआई दिनेश पारीक के नेतृत्व में भारी पुलिस जाप्ता तैनात रहा, जिसने यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को संभाला।
*गंगा-जमुनी तहजीब: हिंदू समाज ने किया स्वागत, कमेटी ने बांधा साफा*
चादर का जुलूस जब सदर बाजार से गुजरा, तो वहां कौमी एकता का अनूठा नजारा देखने को मिला। हिंदू समाज के प्रबुद्ध नागरिकों ने जुलूस का बड़े उत्साह और गर्मजोशी के साथ स्वागत किया।
इस मौके पर उर्स कमेटी की ओर से गंगा-जमुनी तहजीब को आगे बढ़ाते हुए राव रूपेंद्र सिंह कानावत,मांगी लाल अजमेरा,मदन शेखावत,पूर्व सरपंच दुर्गा लाल मेघवंशी,महेंद्र पाटनी,पूर्व उपसरपंच अनिल पाटनी,विनोद शर्मा,अशोक खटीक, सुरेश खटीक, रमेश खटीक, वार्ड पंच सोहन लाल रेगर और प्रकाश खटीक आदि का साफा पहनाकर व माला पहनाकर गर्मजोशी से इस्तकबाल किया गया।
*दूर-दराज से उमड़े जायरीन, पैदल जत्थों ने भी हाजिरी लगाई*
उर्स के मौके पर दरगाह परिसर में जायरीन का समंदर उमड़ पड़ा। इस दौरान दौसा से आए जूनियाँ दरगाह के सज्जदानशीन सूफी डॉ. अब्दुल लतीफ शाह (अन्ना मियां), काछोला के पेश इमाम मोहम्मद शाह आलम असरफी, काछोला सदर हाजी शरीफ मंसूरी, हाजी अब्दुल सलीम बागवान, हाजी मोहम्मद साबिर रंगरेज, रमजान अली बिसायती और यूनिस रंगरेज सहित काछोला, जहाजपुर, खजूरी, भीलवाड़ा, कोटा, बूंदी व कई अन्य जिलों से भारी संख्या में जायरीन पहुंचे।
काछोला से पैदल जायरीनों का एक विशाल जत्था भी चादर शरीफ लेकर दरगाह पहुंचा और बारगाह में हाजिरी लगाई। उर्स कमेटी के नायब सदर फैज मोहम्मद बागवान, हाजी सूफी सलीम बागवान, इमरान बागवान, फिरोज खान, महबूब अली और शब्बीर बागवान सहित सभी सदस्यों ने बाहर से आए मेहमानों और जायरीनों का स्वागत-सत्कार किया।
*मेले जैसा रहा माहौल, बच्चों ने उठाया लुत्फ*
दरगाह परिसर और आसपास के क्षेत्र में मेले जैसा माहौल नजर आया। बच्चों के मनोरंजन के लिए बड़े-बड़े झूले लगाए गए थे। इसके अलावा फूल-चादर, मजार शरीफ की तस्वीरें, बच्चों के खिलौनों और चाट-पकौड़ी की दुकानें सजी हुई थीं, जहां जायरीनों ने जमकर खरीदारी की।
*महफिल-ए-कव्वाली में देर रात तक बंधा समां*
उर्स के उपलक्ष्य में देर रात तक शानदार ‘महफिल-ए-कव्वाली’ का आयोजन किया गया। कव्वाली कार्यक्रम में सरवाड़ के सुप्रसिद्ध कव्वाल नौशाद शोला अजमेरी एंड पार्टी और बेगूं के अनवर भाई ने एक से बढ़कर एक सूफियाना और रूहानी कलाम पेश किए। कव्वालों की बेहतरीन प्रस्तुतियों पर श्रोता झूम उठे और देर रात तक दरगाह परिसर तालियों की गड़गड़ाहत से गूंजता रहा।
