ग्रामीणों का आरोप- न नालियां बनाई, न पुलियाएं, न सड़क के दोनों ओर मिट्टी की भराई; कई जगह सड़क में दरारें और कटाव
मांडलगढ़। स्मार्ट हलचल।क्षेत्र के लिए महत्वाकांक्षी मानी जा रही गोठ–वाया गुप्तेश्वर सीसी लिंक रोड पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त होने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह सड़क लगभग 50 गांवों को जोड़ने के साथ मांडलगढ़ से गुप्तेश्वर की दूरी करीब 20 किलोमीटर कम करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। लेकिन पहली ही बारिश के बाद सड़क के कई हिस्सों में दरारें, उखड़ाव और कटाव दिखाई देने लगे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान मूलभूत तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि सड़क के किनारे जल निकासी के लिए कहीं भी नालियों का निर्माण नहीं किया गया और आवश्यक स्थानों पर पुलियाएं भी नहीं बनाई गईं। बारिश का पानी सड़क पर बहने से कई स्थानों पर सीसी रोड को नुकसान पहुंचा और सड़क के किनारों का कटाव शुरू हो गया।
दोनों ओर नहीं की गई मिट्टी की भराई
ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण पूरा होने के बाद भी सड़क के दोनों ओर मिट्टी की भराई नहीं की गई। इससे सड़क का किनारा खुला रह गया और बारिश के दौरान बहते पानी ने सड़क की नींव को कमजोर कर दिया। लोगों का कहना है कि यदि समय पर मिट्टी का भराव और कम्पेक्शन किया जाता तो सड़क को इस तरह का नुकसान नहीं होता।
कम मोटाई में निर्माण का भी आरोप
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सड़क की सीमेंट कंक्रीट (सीसी) परत निर्धारित मानकों के अनुरूप मोटाई में नहीं बनाई गई। उनका दावा है कि इसी कारण पहली ही बारिश में सड़क कई स्थानों पर टूटने लगी। हालांकि, इस संबंध में अभी तक विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और इसकी तकनीकी जांच होना बाकी है।
50 गांवों के लिए है महत्वपूर्ण सड़क
गोठ–वाया गुप्तेश्वर लिंक रोड क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लिए जीवनरेखा मानी जा रही है। सड़क के निर्माण से किसानों, विद्यार्थियों, श्रद्धालुओं और आम लोगों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद थी। यह मार्ग मांडलगढ़ से गुप्तेश्वर के बीच की दूरी लगभग 20 किलोमीटर कम करता है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।
ग्रामीणों ने की जांच और कार्रवाई की मांग
सड़क की स्थिति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि सड़क पहली ही बारिश नहीं झेल पाई तो निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने, सड़क की मोटाई और गुणवत्ता की जांच करवाने, दोषी पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा सड़क का मानकों के अनुरूप पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।
