मुख्यमंत्री जन आवास योजना (नेहरू विहार) घोटाला: सचिव एपीओ के बाद भी जांच अधर में, कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार

मुख्यमंत्री जन आवास योजना (नेहरू विहार) घोटाला: सचिव एपीओ के बाद भी जांच अधर में, कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार

15.48 करोड़ के नुकसान का आरोप, अतिरिक्त जमीन आवंटन और 3081 भूखंड लॉटरी की अनियमितताओं पर अब तक नहीं हुई अंतिम कार्रवाई

📍 मामले से जुड़े मुख्य आंकड़े व अहम तथ्य:

अनुमानित वित्तीय नुकसान:₹15.48 करोड़
डेवलपर को अतिरिक्त भूमि लाभ:45,533 वर्गफीट
संयुक्त उपक्रम (JV) में अतिरिक्त भूमि:4,230 वर्गमीटर
विवादास्पद भूखंड लॉटरी:3,081 आवासीय भूखंड (80,000+ आवेदक)
अब तक हुई कार्रवाई:तत्कालीन यूआईटी सचिव ललित गोयल एपीओ

भीलवाड़ा, स्मार्ट हलचल। मुख्यमंत्री जन आवास योजना (नेहरू विहार) में करोड़ों रुपए की जमीन के कथित अनियमित आवंटन और 3081 आवासीय भूखंडों की लॉटरी में सामने आई गड़बड़ियों के मामले में शुरुआती प्रशासनिक कार्रवाई के बाद जांच की रफ्तार थम गई है। तत्कालीन नगर विकास न्यास (यूआईटी) सचिव ललित गोयल को एपीओ किए जाने के बावजूद जांच समिति की रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है। ऐसे में पूरे मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट पर अटक गई है।

राज्य सरकार ने नियमों की अनदेखी और भूमि आवंटन में गंभीर अनियमितताओं के आरोपों के बाद यूआईटी सचिव को पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा (एपीओ) में रखा था। उस समय उम्मीद जताई जा रही थी कि जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई होगी, लेकिन कई माह बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

डेवलपर को तय सीमा से अधिक जमीन देने का आरोप

शिकायत के अनुसार मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत डेवलपर फर्म को कुल 3,57,623 वर्गफीट भूमि आवंटित की गई थी। नियमानुसार डेवलपर को प्रोत्साहन के रूप में केवल 25 प्रतिशत यानी 89,406 वर्गफीट भूमि मिलनी थी, लेकिन आरोप है कि अधिकारियों ने 1,34,945 वर्गफीट भूमि आवंटित कर दी। यानी निर्धारित सीमा से 45,533 वर्गफीट अतिरिक्त भूमि का लाभ दिया गया।

आरोप यह भी है कि सब-डिवीजन प्लान में कथित हेरफेर कर अतिरिक्त भूमि डेवलपर के नाम दर्ज कर दी गई। बाजार मूल्य के आधार पर इससे यूआईटी को करीब 15.48 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया गया।

कलेक्टर ने भी जताई थी नाराजगी

मामले की शिकायत मिलने के बाद जिला कलेक्टर ने यूआईटी सचिव से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि निर्धारित समय के बाद भी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। इस पर कलेक्टर ने भी नाराजगी जताई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए तत्कालीन सचिव ललित गोयल को एपीओ कर दिया।

4230 वर्गमीटर अतिरिक्त भूमि देने के भी आरोप

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि संयुक्त उपक्रम (जेवी) से जुड़े भूमि आवंटन में भी नियमों की अनदेखी हुई। आरोप है कि संबंधित पक्ष को करीब 4230 वर्गमीटर अतिरिक्त भूमि का लाभ पहुंचाया गया, जिससे सरकार और यूआईटी को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ।

3081 भूखंडों की लॉटरी भी विवादों में

इसी दौरान यूआईटी की 3081 आवासीय भूखंडों की लॉटरी भी विवादों में रही। इस योजना के लिए करीब 80 हजार आवेदकों ने आवेदन किए थे। लॉटरी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के चलते बड़ी संख्या में लोगों ने शिकायतें दर्ज कराएं। मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर तक पहुंचा तथा पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए।

फर्जी दस्तावेजों और हस्ताक्षरों के आरोप

शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ दस्तावेजों पर उनकी जानकारी के बिना हस्ताक्षर किए गए तथा रिकॉर्ड में हेरफेर की गई। कई दस्तावेजों की वैधता पर भी सवाल उठाए गए। इन बिंदुओं को भी जांच समिति के समक्ष रखा गया था।