1991 की बाढ़ में बहा था पुल, आज तक नहीं हुआ पुनर्निर्माण; ग्रामीण बोले— अब वादे नहीं, स्थायी पुल चाहिए
धौरहरा खीरी।स्मार्ट हलचल।आजादी के करीब आठ दशक बाद भी धौरहरा क्षेत्र के हजारों ग्रामीण एक ऐसे पुल के इंतजार में हैं, जो वर्ष 1991 की बाढ़ में बह गया था। धौरहरा-पंडितपुरवा-सुजई मार्ग पर स्थित दुब घाटा पुल पिछले 34 वर्षों से बदहाल स्थिति में पड़ा है। पुल के अभाव में हर वर्ष बरसात के मौसम में लोगों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता है, लेकिन अब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि 1991 में आई भीषण बाढ़ में दुब घाटा पुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद कई सरकारें बदलीं, जनप्रतिनिधि बदले और विकास के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन पुल का पुनर्निर्माण आज तक शुरू नहीं हो सका। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय पुल निर्माण का मुद्दा जरूर उठता है, लेकिन चुनाव खत्म होते ही यह वादा भी फाइलों में दब जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार बरसात के दौरान पुल के स्थान पर बने अस्थायी रास्ते पर करीब चार फीट तक पानी भर जाता है। ऐसे में स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं, किसानों और मरीजों को इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। तेज बहाव के बीच लोग अपनी जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं। कई बार राहगीर फिसलकर घायल हो चुके हैं और दुर्घटनाओं की घटनाएं भी सामने आई हैं। इसके बावजूद अब तक स्थायी पुल का निर्माण नहीं कराया गया।
दुब घाटा पुल केवल एक गांव की नहीं, बल्कि पंडितपुरवा, सुजई सहित आसपास के कई गांवों के लोगों के लिए प्रमुख संपर्क मार्ग है। इसी रास्ते से किसान अपनी उपज बाजार तक पहुंचाते हैं, छात्र स्कूल-कॉलेज जाते हैं और मरीज अस्पताल तक पहुंचते हैं। पुल न होने के कारण बरसात में कई बार लोगों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त बर्बादी होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुल का निर्माण समय पर कर दिया जाता तो लोगों को वर्षों से इस समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। उनका सवाल है कि आखिर 34 वर्षों में पुल निर्माण क्यों नहीं हो सका? यदि इस संबंध में कोई योजना बनी या धनराशि स्वीकृत हुई थी, तो उसका क्या हुआ? उनका कहना है कि हर साल बरसात के दौरान खतरा बढ़ जाता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि केवल आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी से बच निकलते हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि दुब घाटा पुल का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर तत्काल शुरू कराया जाए। उनका कहना है कि यदि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो क्षेत्र के लोग व्यापक जनआंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका स्पष्ट कहना है कि अब उन्हें केवल घोषणाएं और आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर पुल का निर्माण चाहिए।
हालांकि, इस संबंध में लोक निर्माण विभाग (PWD) अथवा संबंधित जनप्रतिनिधियों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है।
