बेहजम का सामुदायिक शौचालय डेढ़ साल से बंद, कागजों में लाखों का रखरखाव, धरातल पर बदहाली

बेहजम खीरी।स्मार्ट हलचल।एक ओर सरकार स्वच्छ भारत मिशन और संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत साफ-सफाई और बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं का दावा कर रही है, वहीं बेहजम ब्लॉक मुख्यालय स्थित ग्राम पंचायत का सार्वजनिक सामुदायिक शौचालय पिछले करीब डेढ़ वर्ष से बंद पड़ा है। हालत यह है कि शौचालय के मुख्य द्वार पर सुबह 5 बजे से शाम 8 बजे तक संचालन का समय लिखा है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है।

शौचालय के बाहर गंदगी, कूड़े के ढेर और झाड़ियां जमा हैं। इससे कस्बे में आने वाले राहगीरों, व्यापारियों और ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें खुले स्थानों या अस्पताल परिसर के आसपास शौच के लिए जाना पड़ता है, जो स्वच्छता अभियान के दावों पर सवाल खड़े करता है।

मलिकपुर निवासी जाहिद खान ने बताया कि सामुदायिक शौचालय करीब डेढ़ वर्ष से बंद है। वहीं दुकानदार प्रमोद कुमार ने कहा कि उनकी दुकान शौचालय के पास होने के बावजूद सुविधा न मिलने से उन्हें आवश्यकता पड़ने पर करीब दो किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।

शौचालय की केयरटेकर रेणु देवी ने बताया कि उन्हें सरकार से ₹6,000 प्रतिमाह मानदेय मिलता है, लेकिन शौचालय के रखरखाव के लिए निर्धारित ₹3,000 प्रतिमाह की राशि कभी उपलब्ध नहीं कराई गई। उनका कहना है कि बिना बजट के साफ-सफाई और मरम्मत कराना संभव नहीं है।

वहीं ग्राम पंचायत अधिकारी दिलीप भार्गव का कहना है कि केयरटेकर द्वारा रखरखाव संबंधी बिल प्रस्तुत नहीं किए गए, इसलिए भुगतान नहीं किया गया। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी अभिलेखों में हर माह रखरखाव का खर्च दर्ज किया जाता है, जबकि मौके पर शौचालय बंद और बदहाल पड़ा है।