5 साल पुरानी जांच में बड़ी कार्रवाई: ग्राम पंचायत बिलोता के प्रशासक सुरेश मीणा पदमुक्त

मृत व्यक्ति के नाम पर फर्जी मस्टररोल से भुगतान मामले में जांच में उत्तरदायी पाए जाने पर पंचायती राज विभाग का आदेश-अन्य मामलों की जांच अभी जारी

शिवराज बारवाल मीना
टोंक/उनियारा। स्मार्ट हलहल|टोंक जिले की पंचायत समिति उनियारा अंतर्गत ग्राम पंचायत बिलोता में लंबे समय से चर्चित फर्जी मस्टररोल एवं मनरेगा भुगतान प्रकरण में पंचायत राज विभाग ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए प्रशासक (निर्वतमान सरपंच) सुरेश मीणा को पद से पदमुक्त (बर्खास्त) कर दिया है। पंचायती राज विभाग, जयपुर द्वारा 9 जुलाई 2026 को जारी आदेश में अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद टोंक की जांच रिपोर्ट के आधार पर सुरेश मीणा को मृत व्यक्ति के नाम से फर्जी मस्टररोल जारी कर भुगतान कराने के मामले में उत्तरदायी मानते हुए ग्राम पंचायत बिलोता के प्रशासक पद से हटाया गया है।
आदेश में जिला कलेक्टर टोंक को उप सरपंच को प्रशासक का कार्यभार सौंपने तथा विभाग को इसकी सूचना भेजने के निर्देश दिए गए हैं। यह आदेश अतिरिक्त आयुक्त एवं शासन उप सचिव (द्वित्तीय) त्रिलोक चंद मीणा के डिजिटल हस्ताक्षर से जारी हुआ है। जानकारी अनुसार स्थानीय स्तर पर इस जांच कार्रवाई को लगभग पांच वर्षों (29 अक्टूबर 2021) से चल रही जांच का महत्वपूर्ण परिणाम माना जा रहा है। हालांकि, ग्राम पंचायत बिलोता से जुड़े अन्य गबन व वित्तीय अनियमितताओं के प्रमाणित मामलों की जांच अभी भी विभिन्न स्तरों पर लंबित बताई जा रही है।
प्रकरण की जांच करवाने वाले परिवादी शिवराज बारवाल, रामबाबू मीना, लोकेश मीना एवं संतराम मीना का दावा है कि ग्राम पंचायत बिलोता में नरेगा योजना सहित प्रधानमंत्री आवास योजना तथा अन्य निर्माण व विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं की जांच अभी भी जारी है। जिसकी कार्यवाही जिला परिषद स्तर पर लंबित बताई जा रही हैं। परिवादियों के अनुसार, पूर्व में जिला प्रशासन टोंक की जांच में तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी जसराम मीणा, वर्तमान ग्राम विकास अधिकारी जगमोहन मीणा, सरपंच (प्रशासक) सुरेश मीणा, सहायक अभियंता विजय सिंह, तत्कालीन कनिष्ठ तकनीकी सहायक विक्रम कुमावत तथा वर्तमान कनिष्ठ तकनीकी सहायक कमलेश नागर सहित अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका भी जांच के दायरे में रही है। शिकायतकर्ता परिवादियों ने यह भी आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार की शिकायतें उठाने के बाद उनके विरुद्ध राजकार्य में बाधा तथा महिला कार्मिकों से अन्य मामलों में झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए, लेकिन कहावत हैं कि ईश्वर के घर देर हैं लेकिन अंधेर नहीं, सच परेशान हो सकता हैं लेकिन पराजित नहीं।परिवादियों का कहना है कि वे भ्रष्टाचार से जुड़े शेष मामलों में भी निष्पक्ष जांच, सरकारी धन की वसूली तथा दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग जारी रखेंगे और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। इधर, स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पदमुक्त किए गए सुरेश मीणा भारतीय जनता पार्टी के अलीगढ़ देहात मंडल की कार्यकारिणी में महामंत्री पद पर भी कार्यरत बताए जाते हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या भाजपा पार्टी इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अपने स्तर पर भी कोई निर्णय लेगी। हालांकि, इस संबंध में भाजपा पार्टी की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, अब देखना यह होगा कि पार्टी स्तर से कोई कार्यवाही हो पाएगी या नहीं।